कई विपक्षी नेताओं का इस प्रश्न के खिलाफ होना शर्मनाक : आईसा ने एबीवीपी की ओर से ‘ब्राह्मणवादी पितृसत्ता’ पर प्रश्न बनाने वाले शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई की मांग को गलत बताया। संगठन ने कहा कि कुछ विपक्षी नेताओं का भी इस प्रश्न के खिलाफ खड़ा होना बेहद शर्मनाक है।
आईसा के अनुसार, ब्राह्मणवाद का संबंध किसी जाति विशेष से नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था से है जो समाज को श्रेणियों में बांटती है और एक समूह के शासन को वैध ठहराती है। संगठन ने कहा कि भीमराव आंबेडकर, सावित्रीबाई फुले और ज्योतिराव फुले ने इसी व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष किया। आईसा ने कहा कि ‘ब्राह्मणवादी पितृसत्ता’ एक ऐसा सिद्धांत है, जो मानता है कि भारतीय समाज में जाति व्यवस्था और लैंगिक शोषण एक-दूसरे को मजबूत करते हैं।
जांच के लिए बनेगी फैक्ट फाइंडिंग कमेटी : विवाद को सुलझाने के लिए फैक्ट फाइंडिंग कमेटी गठित की जाएगी। यह कमेटी 10 दिनों में अपनी रिपोर्ट देगी। सामाजिक विज्ञान संकाय के डीन अशोक उपाध्याय की ओर से विभागाध्यक्ष को कमेटी गठित कर जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, कमेटी एक ही ढर्रे पर बनने वाले प्रश्नों और पुराने सवालों की समीक्षा भी करेगी।
ब्राह्मणवादी पितृसत्ता सामाजिक अवधारणा : एनएसयूआई
एनएसयूआई ने सोशल मीडिया पर जारी अपने आधिकारिक बयान में कहा कि ‘ब्राह्मणवादी पितृसत्ता’ एक अकादमिक और सामाजिक अवधारणा है। यह किसी जाति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि उस व्यवस्था के विरुद्ध है जो जातिगत और लैंगिक भेदभाव को एक साथ बढ़ावा देती है। संगठन ने कहा कि सिलेबस के अनुसार प्रश्न बनाना शिक्षक का अधिकार है। शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने वाले बीएचयू को आरएसएस की प्रयोगशाला बनाना चाहते हैं। कहा कि ऐसे लोग तमाशा कर आम छात्रों के अधिकारों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।