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UP: ब्राह्मणवादी पितृसत्ता’ शब्द का विरोध, सपा-कांग्रेस से अलग राह पर NSUI और आईसा; प्रश्नपत्र पर विवाद

Fri, 22 May 2026 04:14 PM IST
Aman Vishwakarma अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

Varanasi News: बीएचयू में एमए इतिहास के प्रश्न पत्र में ‘ब्राह्मणवादी पितृसत्ता’ शब्द को लेकर विवाद बढ़ गया है। एबीवीपी, कांग्रेस और ब्राह्मण संगठनों ने इसका विरोध किया, जबकि एनएसयूआई और आईसा ने इसे अकादमिक अवधारणा बताया। विवाद के बाद जांच के लिए फैक्ट फाइंडिंग कमेटी गठित करने का निर्णय लिया गया है।
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इतिहास विभाग के बाहर प्रदर्शन करते छात्र। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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काशी हिंदू विश्वविद्यालय में एमए इतिहास के चौथे सेमेस्टर के प्रश्न पत्र में ‘ब्राह्मणवादी पितृसत्ता’ शब्द को लेकर विवाद गहरा गया है। इस मुद्दे पर विश्वविद्यालय में दो धड़े बन गए हैं। एक ओर एबीवीपी, ब्राह्मण संगठन, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी हैं, जबकि दूसरी ओर एनएसयूआई और आईसा छात्र संगठन के छात्र हैं।

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प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने ‘ब्राह्मणवादी पितृसत्ता’ शब्द का विरोध किया है, वहीं एनएसयूआई की बीएचयू इकाई ने प्रश्न को उचित बताया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय और महानगर अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे ने कहा कि यह महामना के मूल्यों के खिलाफ जातीय भेदभाव और एक वर्ग पर हमला है। 
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एनएसयूआई ने एबीवीपी और आरएसएस को इस विवाद और हंगामे का जिम्मेदार बताया। संगठन का कहना है कि शिक्षक पर कार्रवाई की मांग अकादमिक स्वतंत्रता पर हमला होगा। अजय राय ने कहा कि भारत की सनातन परंपरा में ब्राह्मण समाज सदैव ज्ञान, तप, शिक्षा, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का प्रतीक रहा है।

कई विपक्षी नेताओं का इस प्रश्न के खिलाफ होना शर्मनाक : आईसा ने एबीवीपी की ओर से ‘ब्राह्मणवादी पितृसत्ता’ पर प्रश्न बनाने वाले शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई की मांग को गलत बताया। संगठन ने कहा कि कुछ विपक्षी नेताओं का भी इस प्रश्न के खिलाफ खड़ा होना बेहद शर्मनाक है। 

आईसा के अनुसार, ब्राह्मणवाद का संबंध किसी जाति विशेष से नहीं, बल्कि ऐसी व्यवस्था से है जो समाज को श्रेणियों में बांटती है और एक समूह के शासन को वैध ठहराती है। संगठन ने कहा कि भीमराव आंबेडकर, सावित्रीबाई फुले और ज्योतिराव फुले ने इसी व्यवस्था के खिलाफ संघर्ष किया। आईसा ने कहा कि ‘ब्राह्मणवादी पितृसत्ता’ एक ऐसा सिद्धांत है, जो मानता है कि भारतीय समाज में जाति व्यवस्था और लैंगिक शोषण एक-दूसरे को मजबूत करते हैं। 

जांच के लिए बनेगी फैक्ट फाइंडिंग कमेटी : विवाद को सुलझाने के लिए फैक्ट फाइंडिंग कमेटी गठित की जाएगी। यह कमेटी 10 दिनों में अपनी रिपोर्ट देगी। सामाजिक विज्ञान संकाय के डीन अशोक उपाध्याय की ओर से विभागाध्यक्ष को कमेटी गठित कर जांच कराने के निर्देश दिए गए हैं। विभागीय सूत्रों के मुताबिक, कमेटी एक ही ढर्रे पर बनने वाले प्रश्नों और पुराने सवालों की समीक्षा भी करेगी।
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ब्राह्मणवादी पितृसत्ता सामाजिक अवधारणा : एनएसयूआई
एनएसयूआई ने सोशल मीडिया पर जारी अपने आधिकारिक बयान में कहा कि ‘ब्राह्मणवादी पितृसत्ता’ एक अकादमिक और सामाजिक अवधारणा है। यह किसी जाति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि उस व्यवस्था के विरुद्ध है जो जातिगत और लैंगिक भेदभाव को एक साथ बढ़ावा देती है। संगठन ने कहा कि सिलेबस के अनुसार प्रश्न बनाना शिक्षक का अधिकार है। शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई की मांग करने वाले बीएचयू को आरएसएस की प्रयोगशाला बनाना चाहते हैं। कहा कि ऐसे लोग तमाशा कर आम छात्रों के अधिकारों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
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