रात 11 बजे चांदपुर में बॉब के एटीएम पर कैश जमा करने के लिए लगी भीड़।
मंगलवार रात पांच सौ, एक हजार के नोट बंद करने की घोषणा के बाद लोग सन्न रह गए। घर से बाहर तक लोगों के चेहरे पर हवाइयां उड़ने लगी। पेट्रोल पंपों से लेकर बैंकों के एटीएम तक लेनदेन के लिए लंबी कतारें लग गईं। पांच सौ के नोट के बदले होटलों में खाना नहीं मिला तो ट्रेवेल एजेंसियों ने बुकिंग रद्द कर दी। भीड़ बढ़ी तो बैंकों ने एटीएम के शटर गिरा दिए। देर रात तक चारों तरफ ऐसी ही अफरातफरी मची रही। दो दिन बैंक बंद होने की घोषणा ने छोटी जेब वालों के माथे पर बल डाल दिया...।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पांच सौ और एक हजार नोटों के बंद होने की घोषणा के तुरंत बाद मंगलवार रात शहर में चारों ओर अफरातफरी का माहौल हो गया। घरों में सोने की तैयारी में लगे लोगों ने अचानक सड़कों का रुख कर लिया। एटीएम और ई-कार्नर में कोई पैसे निकालने पहुंचा तो कोई पैसे जमा करने। ज्यादातर बैंकों के एटीएम का शटर गिरने से लोगों की परेशानी बढ़ गई थी। जो एटीएम खुले थे वहां सड़कों तक लंगी लाइन लगी रही। वहीं पट्रोल पंप पर भी देर रात तक पेट्रोल भराने वाले लोगों की लंबी लाइन लगी रही। अपनी जेब में बचे पांच-पांच सौ के नोट चलाने के लिए लोग पंपों पर लाइन लगे हुए थे।
बसों और ट्रेनों में सफर के लिए जाने वाले लोगों का तो बुरा हाल था। लोग परेशान थे कि सफर में उनका खान पान कैसे होगा। ज्यादातर लोेगों के पास पांच सौ के ही नोट थे। कुछ लोगों ने तो यात्रा तक रद्द कर दी। कैंट और मंडुवाडीह रेलवे स्टेशन के पास के एटीएम में तो लंबी लाइन लगी हुई थी। शहर के पॉश इलाके महमूरगंज, सिगरा, रथयात्रा में लोग परिवार के साथ एटीएम में पहुंचे थे। लोगों को पता था कि अगले दो दिन एटीएम बंद रहेंगे और पांच सौ, एक हजार के नोट नहीं चलेंगे। लोगों को सौ-सौ के नोट चाहिए थे। साथ ही जो पांच सौ और एक हजार के नोट थे उन्हें जमा भी करना था। बैंकों ने भी लोगों को खूब धोखा दिया। कुछ एटीएम बंद थे तो कुछ में पैसा ही नहीं था। जो खुले थे उनमें सौ-सौ के नोट ही नहीं थे। होटल और सभी दूकानदारों ने रात में ही नोटों को लेना बंद कर दिया।
वाराणसी। प्रधानमंत्री की घोषणा से बैंकों की चुनौती बढ़ गई है। एसबीआई के एक अधिकारी ने नाम न छापने पर बताया कि बैंकों के रुटीन के काम के अलावा इन नोटों को बदलना सबसे बड़ी चुनौती होगी। इसके लिए अलग काउंटर खोलना पड़ेगा। काउंटर पर काम करने वाले कर्मचारी की सुरक्षा भी करनी पड़ेगी। यूनियन बैंक के एक अधिकारी ने बताया कि बैंकों को पहले एटीएम से पुराने नोट हटाकर प्रचलन वाले नोट डालने होंगे। जनता के पांच सौ और हजार के नोटों को बदलना होगा। हालांकि अधिकारी का कहना है इसके लिए कोई न कोई गाइडलाइन जारी होगी।
कालाधन पर नकेल लगाने की मुहिम में वह धर्मपत्नियां भी फंस गई हैं, जो किसी न किसी तरह खर्च में कटौती कर पहले थोड़ा-थोड़ा धन इकट्ठा करती हैं और दिक्कत पड़ने पर इस पैसे का इस्तेमाल करती हैं।
अब ऐसी महिलाओं को यह समझ नही आ रहा कि आखिर वह इस पैसे का क्या करें, 1000 और 500 की नोट कहां चलाएं। ज्यादातर महिलाओं के तो खाते भी नही हैं कि वह बैंक खुलने के बाद नए नोट ले सकें। घर-परिवार के सपने को साकार करने के उद्देश्य से भी कुछ महिलाओं ने बचत शुरू की थी और सोचा था कि पति को ऐन वक्त पर बचत का पैसा देकर चौंका देंगी पर सरकार के फैसले ने ऐसी गृहणियों को ‘सरप्राइज’ कर दिया। कई महिलाओं के पास तो बचत का आंकड़ा 50 हजार के पार है। इस पैसे को वह ‘व्हाइट’ कैसे सिद्ध कर पाएंगी। फैसले ने पतियों को पत्नियों पर नाराज होने का मौका भी दे दिया है।