चांदपुर औद्योगिक आस्थान स्थित एमएसएमई सभागार में लकड़ी के खिलौनों को देखते अपर आयुक्त प्रशासन सहदेव।
परंपरागत हस्तशिल्प और हथकरघा की धरोहर को आधुनिक डिजाइनों से न केवल सजाया जाए बल्कि उनमें नए-नए प्रयोग भी किए जाएं। आधुनिक डिजाइन और तकनीक के जरिये इस कला की पहचान वैश्विक स्तर पर और मजबूत बनाएं। सोमवार को अपर आयुक्त प्रशासन सहदेव ने हस्तशिल्पियों से ये बातें कहीं। चांदपुर औद्योगिक आस्थान स्थित एमएसएमई सभागार में सर्टिफिकेट कोर्स डिजाइन डायवर्सिफिकेशन फॉर वुडेन ट्वायज का उद्घाटन करते हुए उन्होंने कहा कि दुनियाभर में प्रसिद्ध काशी के हस्तशिल्प को नई तकनीक और नए प्रयोगों से नई मंजिल मिलेगी और उससे इस उद्योग का विकास होगा।
लकड़ी के खिलौने बनाने वाले हस्तशिल्पियों के लिए उत्तर प्रदेश डिजाइन संस्थान लखनऊ, एमएसएमई और निर्यात प्रोत्साहन विभाग के संयुक्त सहयोग से आयोजित यह प्रशिक्षण 19 नवंबर तक चलेगा। प्रथम चरण में 20 हस्तशिल्पी शामिल किए गए हैं। अपर आयुक्त प्रशासन ने और हस्तशिल्पियों को प्रशिक्षण में शामिल करने और उन्हें कंप्यूटर एडेड डिजाइन, पैकेजिंग, डिजिटल फोटोग्राफी, ई-कामर्स के जरिये विपणन और संचार माध्यमों के भरपूर उपयोग के बारे में पूरी जानकारी देने को कहा। उद्योग विभाग के उप निदेशक वाईकेसिंह ने हस्तशिल्पियों का आह्वान किया कि वे अपने उत्पादों की मार्केटिंग खुद करें। खुद निर्यातक बनकर अपने उत्पादों को दुनिया तक पहुंचाएं। इस मौके पर उपायुक्तउद्योग उमेश सिंह के अलावा गोदावरी सिंह और रामेश्वर सिंह सहित अन्य शिल्पी मौजूद थे।