मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को वाराणसी सहित प्रदेशभर के श्रमिकों से वर्चुअल संवाद किया। वाराणसी के 67,759 श्रमिकों के बैंक खाते में भरण-पोषण भत्ता देने की योजना के तहत ऑनलाइन एक-एक हजार रुपए हस्तांतरित किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने असंगठित कर्मकारों के लिए असंगठित कर्मकार सामाजिक सुरक्षा पोर्टल का शुभारंभ किया।
कमिश्नरी सभागार में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी के सिंधोरा के राजमिस्त्री मिथिलेश से बातचीत की। मिथिलेश ने बताया कि उन्हें शिशु मातृत्व योजना, बालिका मदद योजना, चिकित्सा सुविधा व गत वर्ष कोरोना में आपदा राहत योजना में कुल 48 हजार रुपए प्राप्त हुए थे। गत कोरोना कॉल में राशन किट मिली थी। राशन कार्ड बना है, हर माह राशन मिलता है, आज फिर एक हजार रुपये रुपये मिल रहे हैं।
मिथिलेश कुमार ने मुख्यमंत्री से बताया कि उन्होंने श्रम विभाग में 2016 में पंजीकरण कराया था। मिथिलेश ने मुख्यमंत्री का धन्यवाद किया। मुख्यमंत्री ने अन्य श्रमिकों व कामगारों को पंजीकरण के लिए कराने को कहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि कोरोना महामारी से कई श्रमिकों ने भी अपने परिवार के सदस्यों को खोया है। श्रमिकों ने इस घड़ी में धैर्य और साहस का परिचय देने के साथ मजबूती से सरकार का साथ दिया। श्रमिक बंधुओं के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। बैठक के बाद जिलाधिकारी ने मौजूद लाभार्थी श्रमिकों को प्रमाण पत्र सौंपा।
जल्द लागू होगा सामाजिक सुरक्षा गारंटी
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने बाहर से आए कामगारों का भी ध्यान रखा है। प्रदेश के राशन कार्ड पर उन्हें अन्य प्रदेशों में भी राशन दिया जा रहा है। सरकार श्रमिकों के बच्चों और बेटियों के विवाह तक की व्यवस्था कर रही है। श्रमिकों के सुरक्षा पर भी ध्यान दिया जा रहा है। समाजिक सुरक्षा की गारंटी योजना के तहत दो लाख रुपए की धनराशि देंगे। इसे जल्द ही लागू किया जाएगा। बैठक के दौरान अन्य श्रमिकों में नागेंद्र कुमार, धीरेंद्र यादव, सूबेदार व संतोष कुमार के साथ कमिश्नर दीपक अग्रवाल, जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा, विधायक डॉ. अवधेश सिंह, सुरेंद्र नारायण सिंह, सुशील सिंह मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री से बात करने की रह गई कसक
सारनाथ। हवेलिया चौराहा के समीप पास त्रिदेव इंद्रप्रस्थ निर्माण कार्य स्थल से बुधवार को मुख्यमंत्री व मजदूरों के बीच संवाद होना था, लेकिन समय के अभाव की वजह से उनकी सीएम से बात करने की कसक अधूरी रह गई। मुख्यमंत्री सारनाथ के जवाहरलाल राजभर से भी रूबरू होने वाले थे। मुख्यमंत्री से रूबरू होने से पहले जिला अधिकारी ने खूब अच्छे से श्रमिक जवाहर लाल राजभर को श्रम विभाग द्वारा दिए जा रहे सभी योजनाओं के बारे में समझाया था। हालांकि सीएम से बात नहीं कर पाने पर जवाहर काफी निराश हुए।