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Exclusive: काशी में हर दूसरे दिन एक व्यक्ति कर रहा देहदान, मेडिकल छात्रों के रिसर्च में आ रहा काम

Tue, 07 Oct 2025 11:02 AM IST
प्रगति चंद अभिषेक सेठ, संवाद न्यूज एजेंसी, वाराणसी।

सार

Varanasi News: काशी में हर दूसरे दिन एक व्यक्ति देहदान कर रहा है। अपना घर आश्रम के आंकड़ों के मुताबिक वाराणसी में एक साल में 158 लोगों ने देहदान किया। इससे मेडिकल छात्रों के रिसर्च में सुविधा हो रही है।  
 
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काशी में देहदान - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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आध्यात्मिक नगरी काशी में हर दूसरे दिन एक व्यक्ति देहदान कर रहा है। वैदिक काल से लेकर रीतिकाल तक काशी में मृत्यु से मोक्ष की बात मानी जाती थी। वर्तमान में मृत्यु के बाद देहदान के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। यह देहदान मेडिकल कॉलेज के छात्रों के लिए किया जा रहा है, ताकि छात्र शरीर के संरचनाओं पर रिसर्च कर चिकित्सक बन सकें। अपना घर आश्रम के आंकड़ों के मुताबिक, एक साल में 158 लोगों का देहदान किया गया। अधिकतर शव बीएचयू आईएमएस को दिए जाते हैं। आश्रम के संचालक डॉ. के निरंजन बताते हैं कि जिन लोगों की पहचान नहीं हो पाती, उनके शवों को नियमानुसार आईएमएस बीएचयू को सौंप दिया जाता है।

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पोस्टमार्टम के बाद रिसर्च लायक नहीं रहता शव
डॉ. निरंजन बताते हैं कि आश्रम में कई बार ऐसे लोग भी पहुंचते हैं जिनकी मृत्यु स्वाभाविक कारणों से होती है। ऐसे मामलों में पुलिस की उपस्थिति में पंचनामा कराया जाता है। कोई परिजन नहीं मिलता है तो उनका देहदान कर दिया जाता है। हालांकि आकस्मिक मृत्यु होने पर पोस्टमार्टम के बाद शव रिसर्च के योग्य नहीं रहता।

आश्रम ने केवल स्वाभाविक मृत्यु वाले लोगों के देहदान की परंपरा शुरू की। डॉ. निरंजन बताते हैं कि देहदान पूरी तरह लोगों की इच्छा पर होता है। संस्थान को शव दान करने से पहले यह सुनिश्चित किया जाता है कि तीन महीने तक उसे सुरक्षित रखा जाएगा, ताकि कोई परिजन पहुंच जाए तो उसे शरीर सौंपा जा सके। इस अवधि के बाद शरीर मेडिकल कॉलेजों, विशेषकर काशी हिंदू विश्वविद्यालय को शोध कार्यों के लिए दिया जाता है।
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7 साल में 228 का देहदान

अपना घर आश्रम - फोटो : अमर उजाला
डॉ. निरंजन के मुताबिक, दिसंबर 2018 से सितंबर 2025 तक 228 लोगों का देहदान कराया है। बीते एक वर्ष में 158 लोगों का देहदान किया गया है। एक साल के आंकड़े काफी चिंताजनक है। आश्रम से बीएचयू काफी पास में पड़ता है और पूर्वांचल के अन्य मेडिकल कॉलेज को शव लेने में आसानी हो जाती है। इस कारण से अधिकतर शवों को भेजा जाता है।

क्या बोले बीएचयू के प्रोफेसर
अपना घर आश्रम की देहदान की पहल सराहनीय है। पिछले दिनों आश्रम के संचालक डॉ. के. निरंजन और उनकी पत्नी डॉ. कात्यायनी को सम्मानित भी किया गया था। नेत्रदान और रक्तदान के साथ-साथ लोगों को देहदान के लिए भी आगे आना चाहिए। -प्रो. रोयाना सिंह, एनाटॉमी विभाग, बीएचयू

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