इसलिए प्रथम पक्ष की याचिका पोषणीय नहीं है और उसे खारिज कर दिया जाए। गौरतलब है कि इसके पूर्व मंगलवार को श्रृंगार गौरी, आदि विश्वेश्वर और भक्तगणों की तरफ से सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता हरिशंकर जैन ने ज्ञानवापी को हिंदू धार्मिक स्थल घोषित किए जाने और पूजापाठ की अनुमति दिए जाने के पक्ष में दलीलें पेश की थीं।
वहीं, अधिवक्ता ने पक्ष रखते हुए संविधान के अनुच्छेद 25 का हवाला देते हुए कहा था कि पूजन और दर्शन हिंदुओं का मौलिक अधिकार है। हमारे मौलिक अधिकार से हमें कोई वंचित नहीं कर सकता है। भगवान आदि विश्वेश्वर और भगवती श्रृंगार गौरी का मंदिर मुक्त किया जाए।