पूरब में मंगल भवन अमंगल हारी, पश्चिम में अल्लाह हू अकबर
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50 साल से देखते आ रहे हैं लीला, नहीं बदला है स्वरूप
बचपन में इस लीला में भगवान राम का पात्र निभाता था। आज 65 साल से अधिक की अवस्था हो चुकी है, इस लीला से जुड़ा हुआ हूं। बचपन से लेकर आज तक ना तो लीला का स्वरूप बदला और ना ही स्थान। लीला के जरिये चार सौ साल पहले का प्रसंग आज भी सजीव हो उठता है। - दयाशंकर त्रिपाठी, व्यास
नजर आती है हिंदुस्तान की आत्मा
गोस्वामी तुलसीदास और मेघा भगत के अनुष्ठान में हिंदुस्तान की आत्मा नजर आती है। पिछले 40 सालों से लीला से जुड़ा हूं लेकिन आज तक ना तो प्रसंग बदले और ना ही स्थान। 480 साल पुरानी लीला का यह स्वरूप असली हिंदुस्तान के दर्शन कराता है। - कन्हैयालाल यादव, एडवोकेट, प्रधानमंत्री लाटभैरव रामलीला