Varanasi News: संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति ने कहा कि यज्ञानुष्ठान वायु शोधन सबसे बड़ा आयाम है। इससे सबको आरोग्य मुक्त सांस लेने का अवसर मिलता है। पर्यावरण को शुद्ध करने के लिए ऐसे अनुष्ठान की हर जगह जरूरत है। इससे मानसिक परिष्कार भी होता है और व्यक्ति स्वस्थ भी रहता है।
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में एक साल तक होने वाले चतुर्वेद स्वाहाकार विश्वकल्याण महायज्ञ के तीन माह पूरा होने पर मंगलवार को श्रद्धालुओं ने आहुतियां डालीं। इससे वातावरण में आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार हुआ। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा सहित आमजनों ने आहुतियां डालकर प्रभु की आराधना की।
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रुद्रमहायज्ञ में सौ से अधिक लोगों ने रुद्र स्वाहाकार किया। भक्तों ने नवग्रहों और देवों का विधिवत पूजन किया। जोधपुर के अग्निहोत्री ने कहा कि यह महायज्ञ अद्वितीय एवं अनूठा है, जिससे संपूर्ण विश्व में शान्ति स्थापित होगी। साधना आश्रम जसदी वैद्यनाथ के महंत स्वामी अंगद दास महाराज ने कहा कि ऐसे अनुष्ठान से समाज में सामंजस्य, परस्पर मैत्रीभाव के साथ पर्यावरण की शुद्धि होती है।