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वन विभाग की पहल: विदेशियों को गिफ्ट दी जाएंगी बोधि वृक्ष की पत्तियां, सैलानियों को बताया जाएगा ऐतिहासिक महत्व

Wed, 12 Jun 2024 07:52 PM IST
अमन विश्वकर्मा सार्थक पांडेय, अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी

सार

Varanasi News: वाराणसी की सांस्कृतिक विरासत को देखने को लिए हजारों की संख्या में रोजाना लोग आते है। काशी के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए अन्य महत्वपूर्ण साक्ष्यों को भी आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रखा जा रहा है। क्योंकि पुराने वृक्षों के तनों से पेड़ जल्दी निकलते है और उनकी पत्तियां काफी उपयोगी होती है। हर साल बोधि वृक्ष को देखने वालों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।
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सारनाथ स्थित बोधि वृक्ष। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भगवान बुद्ध की प्रथम उपदेश स्थली सारनाथ में बोधि वृक्ष (पीपल) के दर्शन करने के लिए देश ही नहीं विदेशों से भी हजारों लोग आते है। मगर, वह वृक्ष दिन-प्रतिदिन टूट कर गिर रहा है। इसे अब वन विभाग विरासत के रूप में सहेज रहा है। इतना ही नहीं वृक्ष से गिरने वाली पत्तियों को भी वन विभाग सहेज रहा है। उन पत्तियों का ऐतिहासिक महत्व बताते हुए विदेशियों को उपहार स्वरूप दिया जाएगा।
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बोधि वृक्ष अपनी पीढ़ी का चौथा पेड़ है। साथ ही भगवान बुद्ध के सारनाथ में प्रथम उपदेश से जुड़ा है। इसी वृक्ष के नीचे बैठकर भगवान बुद्ध ने अपने प्रथम पांच शिष्यों को उपदेश दिया था। बाद में इस वृक्ष का एक हिस्सा ले जाकर श्रीलंका में लगाया गया था। 

वर्ष 1931 में श्रीलंका से वृक्ष की एक शाखा सारनाथ ले आई गई और उसे मूलगंध कुटी विहार बौद्ध परिसर में लगाया गया। तभी से देश-विदेश से आने वाले बौद्ध अनुयायी यहां आकर दर्शन-पूजन कर वृक्ष की परिक्रमा करते रहे हैं। अभी तक इसके पत्ते ले जाकर लोग अपने घर, पुस्तक या पूजाघर में रखते हैं। मगर, अब इन पत्तियों को वन विभाग ही सुरक्षित कर रख रहा है।
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बोले अधिकारी
बोधि वृक्ष के उपयोग और महत्व को देखते हुए इसके पत्तियों से गिफ्ट बनाने की योजना बनाई जा रही है। विदेशियों को विशेष रूप से ये गिफ्ट दिया जाएगा, जिससे वह अपने देश जाकर इस वृक्ष के महत्व को बताएं। - डॉ. रवि कुमार सिंह, वन संरक्षक
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