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Akshaya Tritiya 2022: अक्षय तृतीया पर दान-पुण्य का मिलता है अक्षय फल, राशि अनुसार करें दान तो प्राप्त होगी कृपा

Mon, 02 May 2022 03:04 PM IST
वाराणसी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

काशी विश्वनाथ मंदिर के न्यासी पं. दीपक मालवीय ने बताया कि अक्षय तृतीया दो मई को रात्रि 3:33 बजे लग जाएगी और तीन मई को रात्रि 5:20 बजे तक रहेगी। तीन मई को प्रदोष व्यापिनी तृतीया तिथि में परशुराम जयंती मनाई जाएगी। अक्षय तृतीया के दिन सूर्य अपनी उच्च राशि में रहते हैं। 
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अक्षय तृतीया - फोटो : फाइल
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विस्तार
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अक्षय तृतीया पर भगवान श्री लक्ष्मीनारायण की प्रसन्नता के लिए व्रत एवं उपवास की परंपरा सनातन धर्म में निभाई जाती है। इस तिथि पर किए गए सभी धार्मिक कृत्य, दान व पुण्य के कार्य अक्षय होते हैं। मान्यता है कि इस दिन ईश्वर की पूजा और दान करने पर जो कृपा हमें प्राप्त होती है वह कभी भी मिट नहीं सकती है।

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श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के न्यासी पं. दीपक मालवीय ने बताया कि अक्षय तृतीया दो मई को रात्रि 3:33 बजे लग जाएगी और तीन मई को रात्रि 5:20 बजे तक रहेगी। तीन मई को प्रदोष व्यापिनी तृतीया तिथि में परशुराम जयंती मनाई जाएगी। अक्षय तृतीया के दिन सूर्य अपनी उच्च राशि में रहते हैं।

अक्षय तृतीया का व्रत रखने वालों को मिलता है सभी तीर्थों का फल
ज्योतिषाचार्य विमल जैन ने बताया कि विष्णु धर्मोत्तर पुराण के लिए जो व्यक्ति अक्षय तृतीया का व्रत रखते हैं उसे सभी तीर्थों का फल प्राप्त हो जाता है। इस दिन अबूझ मुहूर्त की मान्यता है। इस दिन भगवान विष्णु, लक्ष्मीजी तथा कृष्णजी की पंचोपचार एवं दशोपचार अथवा षोडशोपचार पूजन का विधान है।

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शिवपुराण में वर्णन है कि भगवान शिव व माता पार्वती को मालती, मल्लिका, जया, चंपा एवं कमल के पुष्पाें से पूजा-अर्चना कर मनुष्य के कोटि-कोटि जन्म केतन, मन और वचन से किए गए महापाप भी नष्ट हो जाते हैं।
पढ़ेंः अक्षय तृतीया पर बन रहे पंच ग्रहों के सात महायोग, निवेश और खरीदारी के लिए पूरा दिन शुभ

राशि अनुसार करें दान
  • मेष- ब्राह्मण को जौ व सत्तू से निर्मित पदार्थ
  • वृषभ-ऋतुफल, घट एवं दूध
  • मिथुन-हरा मूंग, खीरा, ककड़ी, सत्तू
  • कर्क-जल से पूरित घट, दूध, मिश्री, छाता
  • सिंह-शिव मंदिर में सत्तू, जौ, गेहूं
  • कन्या-मंदिर में खीरा, तरबूज, ककड़ी
  • तुला-श्वेत पदार्थ, मिश्री, दूध
  • वृश्चिक-जल से भरा घट, पंखा, लाल रंग के मिष्ठान्न
  • धनु-शिव मंदिर में चने की दाल से निर्मित पदार्थ, सत्तू तथा ऋतुफल
  • मकर-जल से पूरित घट, मिष्ठान्न एवं दूध
  • कुंभ-गरीब व्यक्ति को जल से पूरित घट, ऋतुफल, गेहूं, सत्तू
  • मीन-बेसन से बने पदार्थ, सत्तू, पीले रंग के मिष्ठान्न तथा खड़ी हल्दी की गांठ
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अक्षय तृतीया से जुड़ीं मान्यताएं और पूजन विधि

पं. मालवीय ने बताया कि अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु माता लक्ष्मी की पूजा का विधान है। पूजा के बाद भगवान को तुलसी के पत्तों के साथ भोजन अर्पित किया जाता है। अक्षय तृतीया के दिन श्रीमद्भागवतगीता के 18वें अध्याय का पाठ करना चाहिए
 
मान्यताएं 
  • अक्षय तृतीया के दिन ही भगवान परशुराम का जन्म हुआ था।
  • इसी दिन मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं।
  • मां अन्नपूर्णा का जन्मदिन भी इस दिन मनाया जाता है।
  • अक्षय तृतीया के दिन ही महर्षि वेदव्यास ने महाभारत लिखना शुरू किया था।
  • इसी दिन युधिष्ठिर को अक्षय पात्र की प्राप्ति हुई थी।

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