शिवपुराण में वर्णन है कि भगवान शिव व माता पार्वती को मालती, मल्लिका, जया, चंपा एवं कमल के पुष्पाें से पूजा-अर्चना कर मनुष्य के कोटि-कोटि जन्म केतन, मन और वचन से किए गए महापाप भी नष्ट हो जाते हैं।
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राशि अनुसार करें दान
- मेष- ब्राह्मण को जौ व सत्तू से निर्मित पदार्थ
- वृषभ-ऋतुफल, घट एवं दूध
- मिथुन-हरा मूंग, खीरा, ककड़ी, सत्तू
- कर्क-जल से पूरित घट, दूध, मिश्री, छाता
- सिंह-शिव मंदिर में सत्तू, जौ, गेहूं
- कन्या-मंदिर में खीरा, तरबूज, ककड़ी
- तुला-श्वेत पदार्थ, मिश्री, दूध
- वृश्चिक-जल से भरा घट, पंखा, लाल रंग के मिष्ठान्न
- धनु-शिव मंदिर में चने की दाल से निर्मित पदार्थ, सत्तू तथा ऋतुफल
- मकर-जल से पूरित घट, मिष्ठान्न एवं दूध
- कुंभ-गरीब व्यक्ति को जल से पूरित घट, ऋतुफल, गेहूं, सत्तू
- मीन-बेसन से बने पदार्थ, सत्तू, पीले रंग के मिष्ठान्न तथा खड़ी हल्दी की गांठ
पं. मालवीय ने बताया कि अक्षय तृतीया के दिन भगवान विष्णु माता लक्ष्मी की पूजा का विधान है। पूजा के बाद भगवान को तुलसी के पत्तों के साथ भोजन अर्पित किया जाता है। अक्षय तृतीया के दिन श्रीमद्भागवतगीता के 18वें अध्याय का पाठ करना चाहिए
मान्यताएं
- अक्षय तृतीया के दिन ही भगवान परशुराम का जन्म हुआ था।
- इसी दिन मां गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं।
- मां अन्नपूर्णा का जन्मदिन भी इस दिन मनाया जाता है।
- अक्षय तृतीया के दिन ही महर्षि वेदव्यास ने महाभारत लिखना शुरू किया था।
- इसी दिन युधिष्ठिर को अक्षय पात्र की प्राप्ति हुई थी।