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कोरोना मरीजों का ग्राफ बढ़ा: वाराणसी में बैंक कर्मी मिला संक्रमित, सक्रिय मामले बढ़कर चार हुए

Fri, 24 Dec 2021 10:27 AM IST
उत्पल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी

सार

वाराणसी में तीन लोग पहले से ही कोरोना संक्रमित हैं। अभी उनकी रिपोर्ट निगेटिव आई नहीं कि शहर में एक और मामला सामने गया है। 
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वाराणसी में कोरोना टीकाकरण - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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'ओमिक्रॉन' की बढ़ती रफ्तार के बीच वाराणसी में कोरोना का संक्रमण धीरे-धीरे ही सही बढ़ने लगा है। पहले से तीन मरीजों के संक्रमित होने के बाद गुरुवार को कैंट निवासी एक और मरीज में संक्रमण की पुष्टि हुई है। वह बैंक कर्मचारी है। कुछ दिन पहले ही लखनऊ में इलाज कराने गए थे, जांच कराई तो रिपोर्ट पॉजिटिव आई है।

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इधर वाराणसी लौटने के बाद इसकी जानकारी होते ही स्वास्थ्य विभाग की टीम घर पहुंची और इनके संपर्क वालों की सैंपलिंग की गई। अब संक्रमित मरीज का सैंपल जीनोम सीक्वेसिंग के लिए केजीएमयू भेजा जाएगा। स्वास्थ्य विभाग की ओर से गुरुवार को अस्पतालों, रेलवे बस स्टेशन सहित अन्य जगहों पर 6175 लोगों का सैंपल लिया गया, जबकि 4895 लोगों की रिपोर्ट आई है।

जीनोम सीक्वेंसिंग रिपोर्ट का इंतजार
सीएमओ डॉ. संदीप चौधरी ने बताया कि कैंट स्थित एक अपार्टमेंट में रहने वाले 47 वर्षीय पुरुष की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। फिलहाल वह होम आइसोलेशन में हैं और स्वास्थ्य विभाग की टीम निगरानी कर रही है। बता दें कि इसके पहले भी जिन तीन लोगों का सैंपल जीनोम सीक्वेसिंग के लिए भेजा गया है, उनकी रिपोर्ट का भी इंतजार है। रिपोर्ट के बाद ही पता चल सकेगा कि ओमिक्रॉन है या फिर कोई अन्य वायरस।
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पढ़ेंः वाराणसी में स्वास्थ्य विभाग की तैयारियां नाकाफी, कोविड मरीज बढ़े तो हो सकती है परेशानी

ऑक्सीजन प्लांट तो लग गया, टेक्नीशियन की तैनाती नहीं

दीनदयाल अस्पताल में ऑक्सीजन प्लांट - फोटो : अमर उजाला
 कोरोना की संभावित तीसरी लहर की अगले महीने से आशंका जताई जा रही है। ऐसे में जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं की बात करें तो कोविड अस्पताल बने हैं, ऑक्सीजन प्लांट भी लगाए जा चुके हैं। चिकित्सकों, कर्मचारियों की तैनाती का भी दावा किया जा रहा है, लेकिन हकीकत इससे परे है।

अगर ऑक्सीजन प्लांट की बात करें तो अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों पर लगे प्लांट को चलाने के लिए कई जगहों पर स्थायी रूप से टेक्नीशियन की तैनाती नहीं हो पाई है।  जिले में इस समय कुल 23 जगहों पर ऑक्सीजन प्लांट लगे हैं। इसकी क्षमता करीब 13 हजार लीटर प्रति मिनट है, इसके माध्यम से करीब 1700 बेड को 24 घंटे ऑक्सीजन मिल सकती है।

गुरुवार को अमर उजाला की पड़ताल में जो हकीकत सामने आई, वो बेहद चौंकाने वाली रही। इसमें स्वास्थ्य केंद्रों पर ऑक्सीजन पाइप लाइन बेड तक मिली। ट्रांसफार्मर भी लग गया है, लेकिन संचालन के लिए स्थायी कर्मचारी न होने की वजह से जैसे-तैसे स्वास्थ्य केंद्र पर कार्यरत कर्मचारियों से काम लिया जा रहा है। 

केस 1 : सीएचसी मिसिरपुर
सीएचसी मिसिरपुर में 30 बेड है और यहां ऑक्सीजन प्लांट लगा है। बेड तक ऑक्सीजन पाइप लाइन भी लग गई है, लेकिन प्लांट संचालन के लिए टेक्नीशियन  नहीं है। चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरबी सिंह के मुताबिक, टेक्नीशियन न होने की वजह से स्वास्थ्य केंद्र के दो कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया है।  

केस-2 : 
सीएचसी चोलापुर में 60 में से 30 बेड पर ऑक्सीजन की सुविधा दी गई है। यहां प्लांट लगकर तैयार है। इसका ट्रायल भी हो चुका है। हकीकत यह है कि प्लांट संचालन के लिए टेक्नीशियन नहीं है। इस वजह से जरूरत पड़ने पर समस्या खड़ी हो सकती है। 
 
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सीएमओ बोले- चल रही तैनाती की प्रक्रिया

सीएमओ  डॉ. संदीप चौधरी ने कहा कि अस्पतालों, स्वास्थ्य केंद्रों पर ऑक्सीजन प्लांट लगाने के साथ ही उसका ट्रायल भी पूरा हो चुका है। जरूरत के हिसाब से स्थायी टेक्नीशियन की तैनाती की प्रक्रिया भी चल रही है। स्वास्थ्य केंद्रों पर तैनात कर्मचारियों को प्रशिक्षित कर प्लांट चलवाया जा रहा है। फिलहाल किसी तरह की कोई समस्या नहीं आने पाएगी। 
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