अतिपिछड़ा अति दलित भागीदारी महा रैली को संबोधित करते पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर
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उत्तर प्रदेश में सरकार में शामिल मंत्री या विधायकों का विरोध अब खुलकर सामने आने लगा है। आए दिन कोई न कोई मंत्री या विधायक सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल रहा है।
इसी क्रम में रविवार को बनारस में भारतीय समाज पार्टी (सुहेलदेव) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने योगी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि सरकार में भ्रष्टाचार कम नहीं हुआ है बल्कि बढ़ रहा है।
कुछ विभागों के अफसर बिना पैसे लिए काम नहीं करते। वह रविवार को छोटी कटिंग स्कूल के मैदान में सुहेलदेव की जयंती पर आयोजित रैली को संबोधित कर रहे थे।
राजभर ने कहा कि गोमती रिवर फ्रंट और वरुणा कारीडोर में पहले बताया गया कि वहां भ्रष्टाचार हुआ है लेकिन सरकार ने अब भ्रष्टाचार को छिपाते हुए इस पर काम को शुरू करा दिया है।
सरकार उन्हें कमजोर न समझे। सत्ता में शामिल होने के बाद भी सरकार में जो गलत है उसका विरोध करते रहेंगे। यह भी साफ किया वह गठबंधन में बने रहेंगे। इतिहासकारों ने सुहेलदेव की उपेक्षा की है। वह जिस सम्मान के हकदार थे वह नहीं दिया गया है। वे पूर्वांचल राज्य बनाने की पुरानी मांग पर भी कायम रहे।
रैली में उमड़ी भीड़
ओम प्रकाश राजभर
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पिछड़ा वर्ग कल्याण एवं दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के मंत्री ओमप्रकाश राजभर की रैली में वाराणसी मंडल के चारों जिलों से कार्यकर्ताओं को बुलाया गया था। रैली में दिन में ग्यारह बजे से लोग पहुंचने लगे। ओमप्रकाश राजभर करीब डेढ़ बजे पहुंचे।
उनके पहुंचने तक छोटी कटिंग का मैदान लोगों की भीड़ से पट गया था। भीड़ देख मंत्री गदगद थे। उन्होंने कहा कि वह अगला लोकसभा चुनाव भारतीय जनता पार्टी के साथ मिलकर लड़ना चाहते हैं लेकिन अगर भाजपा ने नगर निकाय की तरह ही टिकट बांटे तो वह विकल्पों पर भी विचार कर सकते हैं।
करीब 40 मिनट के संबोधन में उन्होंने कहा कि स्कूलों में शिक्षकों की कमी है लेकिन सरकार कोई उपाय नहीं कर रही। कान्वेंट स्कूलों में कम पैसों पर पढ़ा रहे शिक्षकों को पांच हजार रुपये मानदेय देकर सरकारी स्कूलों में सेवा ली जा सकती है।
ये प्रस्ताव सरकार को दिया गया है। अति पिछड़ों और दलितों को जो हक और सम्मान मिलना चाहिए वो नहीं मिला है। पिछड़ा वर्ग में ही कई जातियां ऐसी हैं जो सरकारी सुविधाओं से वंचित हैं।
एमपी, एमएलए की पेंशन बंद कर उस धन को गरीबों, बच्चियों, दिव्यांगों की शिक्षा पर खर्च करना चाहिए। थानों पर सामान्य वर्ग के लोगों को थानेदार बनाया गया है। पिछड़ों और दलितों को भी थानेदार बनाया जाए।