वाराणसी। शीतलहर में लुढ़क कर चार डिग्री पर पहुंचे न्यूनतम तापमान के बीच मंगलवार को पतित पावनी गंगा में मौनी अमावस्या पर श्रद्धालुओं ने आस्था की डुबकी लगाई।
अमावस नहान के लिए गंगा तटों पर श्रद्धालु भोर में ही निकलने लगे थे। इसमें महिलाओं की भीड़ ज्यादा दिखी। वहीं दोनों तटों पर हल्दी-चंदन की अल्पनाएं बनाने और दीप जलाने के साथ ही अन्न-वस्त्र दान की होड़ मची रही।
काशी में सोमवार की मध्यरात्रि के बाद से ही मौनी अमावस्या स्नान के लिए बस अड्डों, रेलवे स्टेशनों के अलावा निजी वाहनों से श्रद्धालुओं की भीड़ सड़कों पर चलने लगी थी। भोर में दशाश्वमेध जाने वाली सड़कों पर भीड़ का दबाव नजर आने लगा था।
हर-हर महादेव के जयकारे लगाते भक्त कंधे पर झोला और बोरियों में खाने-पीने के सामान बांधकर जाते नजर आए। दशाश्वमेध, शीतला, अहिल्याबाई, मीर घाट, तुलसी, रामघाट, पंचगंगा, प्रह्लाद, राजघाट पर गोता लगाने वालों की भारी भीड़ लगी रही।
इस दौरान गंगा के किनारों पर स्नान के साथ दीपदान और गरीबों को अन्न, वस्त्र वितरित करने की होड़ मची रही। उधर, गंगोत्री सेवा समिति और गंगा सेवा समिति की ओर से प्रयाग घाट पर शिविर लगाकर स्नानार्थियों को लाउडस्पीकर से सचेत किया जाता रहा। इस दौरान घाट किनारे बांस-बल्लियों से बैरीकेडिंग कराई गई थी। नावों पर जल पुलिस के जवान तैनात थे, ताकि किसी भी तरह की अनहोनी को टाला जा सके।