ओबरा और दुद्धी विधानसभा भले ही मौजूदा समय में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित हो लेकिन इस सीट पर पर सामान्य, पिछड़ा और अनुसूचित जाति के लोग भी नामांकन दाखिल कर सकेंगे।
सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने वाले पंकज मिश्रा की शिकायत पर चुनाव आयोग की तरफ से जिला निर्वाचन अधिकारी राज्य निर्वाचन आयुक्त को भी इसके लिए दिशा-निर्देश जारी कर दिया गया है।
बताते चलें कि सुप्रीम कोर्ट में 22 मार्च को सुनवाई होनी है, जिसमें अगर संवैधानिक त्रुटि की पुष्टि हुई तो चुनाव की वैधता पर विचार किया जाना है। बताते हैं कि इसको लेकर चुनाव याचिका दाखिल करने के लिए संबंधित व्यक्ति का नामांकन दाखिल होना जरूरी है।
इसी क्रम में शुक्रवार को पंकज जिला मुख्यालय पर ओबरा सीट से नामांकन पत्र खरीदने गए हुए थे। उन्होंने काउंटर पर नामांकन पत्र मांगा तो देने से इंकार कर दिया गया। प्रकरण से उन्होंने डीएम को अवगत कराया तो उन्होंने भी मना कर दिया।
तब मेल के जरिए भारत निर्वाचन आयोग के मुख्य चुनाव आयुक्त नसीम जैदी और आयोग के वरिष्ठ प्रमुख सचिव आरके श्रीवास्तव को शिकायत भेजी। आरोप है कि इसके बाद भी पर्चा देने में आनाकानी की जाती है।
तब चुनाव आयोग ने इस पर नाराजगी जताने के साथ ही ओबरा-दुद्धी सीटों पर सभी वर्ग के लोगों को नामांकन पत्र निर्गत करने का निर्देश जारी कर दिया। साथ ही रिटर्निंग अफसर के लिए निर्देश दिया कि नामांकन पत्र वैध हैं या अवैध, इस पर नामांकन पत्र जांच के बाद निर्णय लेने का उनका अधिकार सुरक्षित रहेगा।
इसको लेकर आयोग के प्रेक्षकों को भी जरूरी दिशा-निर्देश दिए गए हैं। उधर, उप जिला निर्वाचन अधिकारी रामचंद्र का कहना था कि नामांकन पत्र जो भी खरीदना चाहेगा, उसे उपलब्ध कराया जाएगा लेकिन पर्चा उसी का वैध होगा, जो पर्चे के साथ अनुसूचित जनजाति का प्रमाणपत्र संलग्र करेगा।