पूछताछ में आनंद ने बताया कि वह आशीर्वाद मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल में वर्ष 2021 से काम कर रहा था। डॉ. अजय, डॉ. श्याम नारायण, डॉ. आशीष और डॉ. अरुण को पहले से जानता था। डॉ. अजय से उसकी मुलाकात सुजीत पटेल ने कराई थी। आनंद ने बताया कि उसे पैसे की जरूरत थी। आशीर्वाद मल्टीस्पेशलिटी हॉस्पिटल से चिकित्सकीय उपकरण चुरा कर चारों क्लीनिक संचालकों को बेचने लगा। इस काम में उसकी मदद सुजीत पटेल करता था। सुजीत की तलाश में पुलिस की दो टीम लगाई गई हैं। सभी आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई कर उनकी संपत्ति जब्त की जाएगी।
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औने-पौने दाम में बेचता था उपकरण
आनंद ने बताया कि चारों क्लीनिक संचालकों को पता था कि वह उन्हें चोरी के चिकित्सकीय उपकरण बेचता है। इसलिए सभी उससे औने-पौने दाम में ही उपकरण खरीदते थे। वहीं, नाम के साथ डॉक्टर लिखने वाले चार अन्य आरोपियों ने बताया कि उनमें से कोई एमबीबीएस की पढ़ाई नहीं किया है। सभी जैसे-तैसे क्लीनिक संचालित कर रहे थे और ग्रामीण इलाकों के मरीजों का ही उपचार करते थे। कभी बात बिगड़ जाती थी तो मरीज के परिजनों को पैसा देकर मुंह बंद करा देते थे।
चारों क्लीनिक के खिलाफ कार्रवाई के लिए लिखा पत्र
इंस्पेक्टर भेलूपुर रमाकांत दुबे ने बताया कि डॉ. श्याम नारायण मौर्य अखरी बाईपास स्थित शिवा हॉस्पिटल से पकड़ा गया है। डॉ. आशीष कुमार सिंह अमरा स्थित ओम हॉस्पिटल, डॉ. शिव कुमार यादव अवलेशपुर स्थित श्रेष्ठा हॉस्पिटल और डॉ. अरुण कुमार यादव अमरा स्थित मेडिक्स लाइफ केयर हॉस्पिटल से पकड़ा गया है। तथाकथित चारों डॉक्टरों के पास से एमबीबीएस या बीएएमएस जैसी कोई डिग्री नहीं मिली है। चारों हॉस्पिटल भी स्वास्थ्य विभाग में पंजीकृत नहीं हैं। चारों क्लीनिक के खिलाफ कार्रवाई के लिए मुख्य चिकित्साधिकारी को पत्र लिखा गया है। उनसे यह भी अनुरोध किया गया है कि वह तस्दीक करा लें कि जिले में अन्य जगह भी तो इसी तरह से हॉस्पिटल नहीं संचालित हो रहे हैं।