घाटों पर अस्थायी दुकानदारों की नंबरिंग शुरू कर दी गई है। अतिक्रमण पर रोक लगाने की पहल के साथ उस प्रयास को आगे बढ़ाया जा रहा है जो रोजाना कमाने और खाने वालों के लिए मददगार साबित होगा।
गंगा घाटों पर हो रहे अतिक्रमण पर रोक लगाने की पहल नगर निगम ने शुरू कर दी है। इसके तहत अस्थायी दुकानदारों की नंबरिंग की जा रही है ताकि यह पता चल सके कि किस घाट पर कितनी दुकानें लगाई जा रही हैं।
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इनमें चाय, झालमुड़ी, शर्बत, बर्फ गोला, बच्चों के खिलौने आदि की दुकानें हैं। जो सुबह से शाम तक घाटों पर दुकानें लगाते हैं। सामान बेचकर आठ बजे तक चले जाते हैं। कुछ दुकानें देर रात तक रहती हैं। इनकी आड़ में कई अवैध लोग भी यहां कारोबार करने लगते हैं। इसके चलते यहां अतिक्रमण हो जाता है और पर्यटकों को परेशानी होती है।
इसे देखते हुए हर घाट पर दुकान लगाने वालों को नंबर दिया जा रहा है, ताकि यह पता चल सके कि किस घाट पर कितनी दुकानें लग रही हैं। ज्यादातर दुकानें दशाश्वमेध, अस्सी, सिंधिया, मणिकर्णिका, हरिश्चंद्र, राजघाट, शिवाला, तुलसी आदि घाटों पर होती हैं। यहीं पर सबसे अधिक पर्यटक आते हैं।
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इन्हीं घाटों से होकर लोग दूसरे घाटों पर भी जाते हैं। दुकानों को नियमित करने से अतिक्रमण पर लगाम लगाई जाएगी। प्रवर्तन दल के प्रभारी संदीप शर्मा की ओर से लगातार गंगा घाटों पर अभियान चलाया जा रहा है। अवैध दुकानों को हटवाया जा रहा है। जो पक्के निर्माण कराए हैं उन्हें ध्वस्त कराया जा रहा है।