डेंगू-मलेरिया वार्ड (सांकेतिक तस्वीर)
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मलेरिया के लक्षण वाले मरीजों को अब जांच के लिए भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी। रैपिड किट से अब उनके घर पर ही मलेरिया की जांच होगी। आशा कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण दिया गया है, जो घर पहुंचकर जांच करने के साथ ही लोगों को लक्षण, बचाव के उपाय भी बताएंगी। अगर किसी में मलेरिया की पुष्टि होती है तो उन्हें स्वास्थ्य विभाग की ओर से अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा।
बरसात के मौसम में मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है। मलेरिया, डेंगू जैसी संक्रामक बीमारियों के मरीज भी मिलते हैं। इसे देख जून को ‘मलेरिया रोधी’ माह के रूप में मनाया जाता है। सीएमओ डॉ. संदीप चौधरी ने बताया कि लक्षण वाले मरीज को अस्पताल में भर्ती कराया जाएगा।
जिला मलेरिया अधिकारी एससी पांडेय ने बताया कि आशा कार्यकर्ताओं को दस-दस रैपिड किट प्रदान किया गया है। जांच के लिए सभी को प्रशिक्षित किया जा चुका है। साथ ही पीएचसी की ओर से गठित रैपिड रिस्पांस टीम मरीजों की निगरानी करेगी।