वाराणसी कमिश्नरेट में अभी दो जोन काशी और वरुणा है। हालांकि ग्रामीण पुलिस के शामिल होने के बाद एक और जोन बनेगा। रूरल जोन बनाया जा सकता हैं। इसके अलावा सर्किल की संख्या छह से बढ़कर 9 या 10 हो सकती है।
छह सर्किल में सारनाथ, कोतवाली, दशाश्वमेध, भेलूपुर, चेतगंज और कैंट बनाया गया। जबकि ग्रामीण के पिंडरा, बड़ागांव और सदर को जोड़ते हुए सर्किल की संख्या नौ हो जाएगी। पुलिस उच्चाधिकारियों के अनुसार आवश्यकतानुसार कुछ क्षेत्र को अलग करते हुए सर्किल की संख्या 10 भी संभव है।
पुलिस उच्चाधिकारियों के अनुसार एक ही जिले में पुलिस की दो अलग व्यवस्था होने के चलते आपसी समन्वय स्थापित करने में काफी दिक्कतें होती थी। वीआईपी और वीवीआईपी मूवमेंट, त्योहार के दौरान यह परेशानियां और बढ़ जाती थी। कहीं कोई घटना होती थी तो ग्रामीण और कमिश्नरेट सीमा विवाद की स्थिति बन जाती थी।
आपराधिक घटना या कोई बड़ी बात होने पर शासन में बैठे पुलिस अधिकारियों को भी वाराणसी ग्रामीण और कमिश्नरेट को लेकर भ्रम की स्थिति हो जाती थी। दूसरी बात कि अलग व्यवस्था होने पर पुलिस विभाग को दोहरा खर्च वहन करना पड़ता था।
बेहतर पुलिसिंग के लिए मार्च 2021 को वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस का गठन किया गया था। इसमें शहर के 18 थानों को कमिश्नरेट में शामिल किया गया था। ग्रामीण पुलिस अलग होते ही संसाधन भी अलग हो गए। पुलिस लाइन दो बन गई। ट्रैफिक व्यवस्था में बंटवारा हो गया। ग्रामीण पुलिस कार्यालय हरहुआ स्थित किराये के भवन में संचालित होने लगा।
अब कमिश्नरेट में ग्रामीण पुलिस के 12 थाने राजातालाब, रोहनिया, जंसा, मिर्जामुराद, कपसेठी, बड़ागांव, लोहता, चौबेपुर, चोलापुर, सिंधोरा, फूलपुर और बड़ागांव स्थित महिला थाना भी शामिल हो गया। कमिश्नरेट के थानों में कोतवाली, आदमपुर, रामनगर, भेलूपुर, लंका, चितईपुर, मंडुवाडीह, चेतगंज, जैतपुरा, सिगरा, कैंट, शिवपुर, सारनाथ, लालपुर-पांडेयपुर, दशाश्वमेध, चौक, लक्सा, महिला थाना और पर्यटक थाना शामिल है। हो सकता है कि कमिश्नरेट बनने पर पूरे जिले में महिला थाना एक हो जाए।