इसके लिए खंभों के ऊपर (एलीवेेटेड) लोहे की ट्यूब बिछाई जाएगी। इसके अंदर लंबी सिंगल बोगी होगी, जो हवा में तैैरती हुई चलेगी। इसमें घर्षण नहीं होता है और इसके संचालन में बिजली का खर्च भी बहुत कम होगा। इस ट्रेन के कारण प्रदूषण भी नहीं होगा। ट्रेन का किराया हवाई जहाज से कम होगा।
हालांकि अभी इन ट्रेनों के संचालन में काफी चुनौतियां हैं, लेकिन, भविष्य में चलने पर इससे काफी लाभ होगा। इस दौरान बरेका महाप्रबंधक पीके साहा के साथ विभिन्न विभागों के प्रमुख विभागाध्यक्ष अन्य अधिकारी उपस्थित रहे। अंत में प्राविधिक प्रशिक्षण केंद्र के प्राचार्य रामजन्म चौबे ने सभी के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।