तीन करोड़ 55 लाख रुपये की लागत से बने साउथ एशिया के पहले स्पीड ब्रीड प्रयोगशाला का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बृहस्पतिवार को लोकार्पण किया। पाकिस्तान, भूटान, मालदीव, नेपाल, भारत सहित दक्षिण एशियाई देशों के लिए धान की उन्नत किस्मों पर वैज्ञानिक यहां शोध कर सकेंगे। पहले धान की प्रजातियों पर शोध करने में 10 साल लगते थे, अब स्पीड ब्रीड प्रयोगशाला में पांच साल में ही क्रास प्रजातियों पर शोध पूरे हो सकेंगे। इससे किसानों को नई और उन्नत किस्म के बीज मिलेंगे। प्रयोगशाला में छह धान की प्रजाति के 16 हजार पौधे लगाए गए हैं। जिसमें तैयार धान के बीज के किस्मों में पोषक तत्व, रोग प्रतिरोधक क्षमता और उत्पादन बढ़ाने पर शोध किया जा रहा है। यहां सब्जियों, गेहूं और मक्के पर भी शोध होगा।
अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान दक्षिण एशिया क्षेत्रीय केंद्र के निदेशक डॉ. सुधांशु सिंह ने बताया कि जलवायु परिवर्तन, बढ़ती आबादी को देखते हुए पादप प्रजनन फैसिलिटी (स्पीड ब्रीड) कृषि वैज्ञानिकों के बीच एक उभरती हुई तकनीक है। पहले एक साल में सामान्य विधि मौसम के आश्रय एक से दो संततियों को प्राप्त किया जा सकता था जबकि स्पीड ब्रीड प्रयोगशाला में अब एक साल में चार से पांच संततियों (जनरेशन) को प्राप्त किया जा सकेगा।
कृत्रिम रोशनी में पौधो को मिलेगा पोषण
स्पीड ब्रीड प्रयोगशाला में चार चेंबर बनाए गए हैं। जिसमें शोध के लिए लगाई धान की छह क्रास प्रजातियों पर कृत्रिम रोशनी, पानी, हवा जरूरत और मौसम के अनुकूल दिया जाएगा। पौधों के तेजी से विकास के लिए सात रंग की रोशनी समय-समय पर दी जाएगी। जिससे पौधे कम समय में ही तैयार हो जाएंगे।