बाजार में विभिन्न कंपनियों के दूध और इससे बने खाद्य उत्पाद के बीच जल्दी ही बीएचयू का प्रोडक्ट भी बिकेगा। इस दिशा में तैयारी शुरू हो चुकी है। दूध को पाश्चराइज्ड करके पैकेट में इसकी बिक्री की जाएगी।
इस प्रोजेक्ट के लिए लगभग 20 करोड़ रुपये की स्वीकृति मिल चुकी है। प्रोडक्शन सेंटर बरकछा परिसर में स्थापित करने की योजना है।
कार्ययोजना के अनुसार अगले छह माह में बरकछा में बड़े पैमाने पर पशुपालन किया जाएगा। यहां पशुओं को रखने के साथ ही उनके उपचार के लिए एक अस्पताल भी बनाया जाना है।
पूर्वांचल और बिहार के कुछ जिलों से प्रतिदिन लगभग एक लाख लीटर दूध खरीदा जाएगा। यहां दूध से घी, लस्सी, चॉकलेट, मट्ठा, आइसक्रीम आदि भी बनाने की योजना है। इसके साथ ही दूध पाश्चराइज्ड करने की मशीन लगाई जाएगी।
यहां के दूध की आपूर्ति सर सुंदरलाल अस्पताल के मरीजों के लिए भी की जाएगी। जहां तक दूध की कीमत की बात है तो वो 32 रुपये प्रति लीटर होगी।
प्रोजेक्ट से जुड़े अधिकारियों का दावा है कि बीएचयू का दूध अन्य कंपनियों के दूध से अच्छा होगा। इतना ही नहीं, बीएचयू अपने केंद्र से बिहार और पूर्वांचल के दुग्ध उत्पादकों को भी जोड़ेगा। उन्हें समय-समय पर प्रशिक्षण दिया जाएगा।
कुलपति के निर्देश पर कार्ययोजना तैयार की गई है। दूध और उससे बनी खाद्य सामग्रियों को बेचने की तैयारी चल रही है। अगले छह माह में बरकछा में प्रोडक्शन सेंटर स्थापित होने की उम्मीद है। बीएचयू का दूध अन्य कंपनियों से सस्ता और गुणवत्तायुक्त होगा।
- प्रो. आरपी सिंह, निदेशक, कृषि विज्ञान संस्थान, बीएचयू