नोटबंदी के महीने भर बीतने के बाद भी कैश को लेकर हालात जस के तस हैं। आरबीआई की ओर से मांग के अनुरूप नोटों की आपूर्ति न हो पाने से संकट और बढ़ गया है। हालात यह है कि बैंकों में हंगामा, मारपीट की नौबत आ गई है।
लोग इस कदर नाराज हो रहे हैं कि बैंकों में लगे नो कैश के बोर्ड उखाड़ने, कर्मियों पर गुस्सा उतारने की घटनाएं होने लगी हैं।
शुक्रवार को वाराणसी के ग्रामीण क्षेत्रों में कई जगह लोगों में रोष दिखा। धौरहरा के यूनियन बैंक में रुपये नहीं होने के कारण ग्रामीणों ने हल्ला मचाना शुरू कर दिया। हालात को देखते हुए बैंक मैनेजर ने बैंक बंद कर दिया और ग्राहकों के साथ बाहर बैठ गये।
मोहन सराय स्थित काशी गोमती ग्रामीण बैंक में बैंक खुलने के बाद ही नो कैश का बोर्ड लगा दिया। इतनी भंयकर ठंड में लोग सुबह से लाइन लगाकर अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। लेकिन नो कैश का बोर्ड देखकर लोग हताश और उदास दिखे।
वहीं, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया की ताड़ी शाखा में ग्राहकों को जब कैश नहीं मिला तब वे शोर करने लगे। नाराज लोगों ने चक्का जाम कर दिया। नारेबाजी करने लगे और बाबतपुर जमालपुर मार्ग को जाम कर दिया। जिससे आवागमन ठप हो गया।
दरअसल, इस बैंक में इधर कुछ दिनों से मात्र दो हजार रुपया दिया जा रहा था। मगर शुक्रवार को बैंक मैनेजर ने नो कैश कहकर अपनी असमर्थता जतायी। इस बात को लेकर ग्राहक भड़क उठे।
दूसरी ओर डीरेका एसबीआई में शुक्रवार को 2600 लोगों के वेतन जारी किए गए। इसलिये यहां सुबह से ही काफी भीड़ जमा है। दोपहर तक लाइन में 700 से ज्यादा लोग कतार में दिखे। चोलापुर के महोव युनियन बैंक की शाखा और स्टेट बैंक में भी काफी लंबी लाइन दिखी।
आठ नवंबर को सरकार द्वारा नोटबंदी का फैसला लेने के बाद राहत नहीं मिल पाई है। अपने पास पड़े पुराने नोटों को तो लोगों ने बैंकों-डाकघरों में जाकर बदल और जमा कर दिया लेकिन उसके बदले में मांग के अनुरुप नई करेंसी न के बराबर मिली। अब जबकि फैसले को एक महीना हो गया है , हालत सुधरने के बजाय बेकाबू होते जा रहे हैं।