चांदपुर स्थित अमर उजाला कार्यालय में स्मार्ट सिटी पर आयोजित चर्चा में शामिल शहर के प्रबुद्धजन।
देश के सौ स्मार्ट शहरों में काशी को शामिल कराने की कवायद एक बार फिर शुरू हो गई है। काशी को इस दौड़ में शामिल कराने से पहले शहर की खूबियों, ताकतों और कमजोरियों की पड़ताल भी हो रही है। इसी सिलसिले में सोमवार को अमर उजाला कार्यालय में स्मार्ट सिटी को लेकर कार्यशाला का आयोजन किया गया। ‘अपनी काशी- कैसी काशी’ विषयक चर्चा में पर्यटन, शिक्षा, कारोबार, स्वास्थ्य, सामाजिक सेवा आदि क्षेत्रों से जुड़े विशेषज्ञों ने अपना-अपना नजरिया पेश किया। शहर को उजाड़े बिना उसे कैसे संवारा जाए, इस पर खुली चर्चा हुई। बुनियादी सुविधाओं के मौजूदा हाल के साथ ही आने वाली चुनौतियों पर भी यहां गंभीर मंथन हुआ...।
काशी की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत उसकी पूंजी है। पर्यटन शहर के एक बड़े वर्ग की आमदनी का मुख्य जरिया है मगर केवल विरासत को सहेजने से बात नहीं बनेगी। पर्यटन को तीर्थाटन के नजरिए से विकसित करना होगा। ज्यादातर सैलानी तीर्थाटन के लिए ही यहां आते हैं। ऐसे में उनकी सहूलियतों का ख्याल रखना जरूरी है। यहां की संस्कृति के साथ ही साथ संस्कृत और कर्मकांड को भी प्रोत्साहन मिलना चाहिए। इसे कौशल विकास से जोड़ने की बेहद जरूरत है। स्मार्ट सिटी पर चर्चा में शामिल अलग-अलग क्षेत्रों के नुमांइदों का कहना था कि शहर की बुनियादी दिक्कतों को दूर करने के लिए जरूरी है कि संसाधन बढ़ाए जाएं और अधिकारियों को समय पर अपना काम पूरा करने के लिए पाबंद भी किया जाए।
वक्ताओं ने कहा कि गंगा, वरुणा और असि तीनों नदियां इस शहर की पहचान हैं। इनके संरक्षण का खाका तैयार होना चाहिए। इनकी निर्मलता और अविरलता के बगैर काशी को स्मार्ट सिटी का दर्जा दिलाना बेमानी होगी। बात जब एरिया बेस्ट डेवलपमेंट की चली तो विशेषज्ञों ने साफ कहा कि सारनाथ सबसे मुफीद जगह होगी। इसे मॉडल के रूप में विकसित किया जा सकता है। हालांकि कुछ लोगों की राय थी कि पुराने शहर (राजघाट से दशाश्वमेध) के घाट किनारे के मोहल्लों को भी इस योजना में शामिल किया जा सकता है। चर्चा में शहर में व्याप्त गंदगी, बढ़ते प्रदूषण, महिला प्रसाधन केंद्र, जाम, अतिक्रमण आदि विषयों पर भी बेबाकी से राय रखी और इन समस्याओं के निदान के लिए कुछ उपाय भी सुझाए। चर्चा के दौरान ही लैंड बैंक की कमी का जिक्र आया। इस पर लोगों का कहना था कि शहर के अंदर नगर निगम के पास सैकड़ों एकड़ जमीन ऐसी है जिसका कोई इस्तेमाल नहीं हो रहा। उदाहरण के तौर पर कज्ज्जाकपुरा स्थित क्षय रोग अस्पताल के खाली पड़े भूखंड में विशेश्वरगंज गल्ला मंडी को शिफ्ट करने का सुझाव आया। इसके साथ ही पांडेयपुर में स्थित मानसिक चिकित्सालय को शहर से बाहर करने और उस परिसर को खेल गांव के रूप में तब्दील करने का सुझाव भी लोगों ने दिया। जिला जेल को शहर से बाहर कर उस भूखंड को हेबीटेट सेंटर के रूप में विकसित करने पर भी जोर दिया गया।