कैंट रेलवे स्टेशन के मुख्य भवन तक पैदल और वाहन से आने-जाने वाले यात्रियों की सुविधा के लिए सामने की चहारदीवारी तो ढहा दी गई लेकिन अतिक्रमणकारियों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। जीआरपी और आरपीएफ की शह पर सजने वाली दूकानों के चलते चहारदीवारी गिराने का कोई लाभ नजर नहीं आ रहा। वाहन तो दूर पैदल जाने वाले यात्रियों को भी धक्कामुक्की करनी पड़ती है।
कैंट रेलवे स्टेशन का प्रवेश हो या निकास द्वार, 24 घंटे अतिक्रमण की चपेट में रहता है। प्रवेश द्वार के आसपास ही नहीं मुहाने पर भी जूस, आर्टिफिशियल आभूषण, पान आदि की दूकानें हैं। वाहन बड़ी मुश्किल से अंदर जा पाते हैं। निकास द्वार पर पड़ाव मुगलसराय जाने वाले वाहनों का कब्जा रहता है। हाल ही में प्रवेश द्वार के पास बने कैब-वे को रेल यात्रियों के लिए खोलने के लिए चहारदीवारी ढहा दी गई पर अतिक्रमण जस का तस है। प्रवेश द्वार से लेकर आसपास फल, गुटका, पान आदि बेचने वाले जमे रहते हैं। वहीं निकास द्वार पर प्राइवेट वाहनों का कब्जा रहता है।