वर्ष 2017 के रसायन विज्ञान के नोबल पुरस्कार विजेता और कोलंबिया विश्वविद्यालय के प्रोफेसर जोआचिम फ्रैंक भारतीय वैज्ञानिकों की प्रतिभा के कायल हैं। उनका कहना है कि भारत के वैज्ञानिक बहुत अच्छा काम कर रहे हैं।
उनमें प्रतिभा की कमी नहीं है, बस यहां उनके काम के मुताबिक पर्याप्त संसाधन नहीं हैं। यदि सरकार ऐसी सुविधाओं के विकास पर ध्यान दे तो बेहतर परिणाम आएंगे। देश के विकास की गति भी तेज हो जाएगी।
काशी दौरे पर आए फ्रैंक ने सोमवार को जीएस मेमोरियल हॉस्पिटल, महमूरगंज में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान ये बातें कहीं। नोबल विजेता ने कहा कि विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में अभी बहुत कुछ करने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि वह आने वाले दिनों में युवा वैज्ञानिकों को क्रायो इलेक्ट्रान माइक्रोस्कोपी के क्षेत्र में प्रशिक्षित करेंगे।
इसमें उन्हें माइक्रोस्कोपी की तकनीक के बारे में जानकारी दी जाएगी। बताया कि बहुत से मालीक्यूल हैं, जिन्हें देखा नहीं जा सकता लेकिन अब यह संभव हो गया है।
क्रायो इलेक्ट्रान पर अपने शोध के बारे में फ्रैंक ने कहा कि इसमें वैज्ञानिक टॉम सीज, आडा पेनाथ और बीएचयू से शोध करने वाले राजेंद्र अग्रवाल के सहयोग को कभी नहीं भूल सकता है।
उन्होंने बताया कि जब मेरा शोध चल रहा था, उस समय मुझे ऐसे सहयोगी की तलाश थी, जो राइबोसोम के बारे में जानता हो। उसी दौरान बीएचयू के माइक्रोबायोलोजी विभाग से प्रो. डीपी वर्मा के निर्देशन में शोध करने वाले राजेंद्र अग्रवाल का साथ मिला।
राजेंद्र ने इस शोध में मेरी बहुत मदद की। 10 दिसंबर को जब नोबल पुरस्कार मिलेगा, तब अग्रवाल भी मौजूद वहां रहेंगे। इसके लिए उन्हें आमंत्रण भेजा गया है। उन्होंने सीबी रमन सहित अन्य नोबल विजेताओं के बारे में भी चर्चा की।
फ्रैंक को काशी की संस्कृति और अध्यात्म ने काफी प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि पहली बार काशी आने के बाद जो सुखद अनुभूति हो रही है, वह कभी नहीं हुई।
अब तो परिवार के बाकी सदस्यों को लेकर भी भोले की इस नगरी में घूमने आएंगे। कहा कि काशी की सभ्यता और संस्कृति की चर्चा पूरे विश्व में होती है। ऐसा शहर पूरी दुनिया में कहीं नहीं है। यहां की देव दीपावली जैसा अप्रतिम दृश्य मैंने पहले नहीं देखा था।