हमारे देश की गुरु-शिष्य परंपरा अद्भुत है। जिसे सीखना होता है वो कहीं से भी सीख लेता है। अच्छा सीखने के लिए किसी कारण की आवश्यकता नहीं होती। जगद्गुरु रामानंदाचार्य ऐसे आकाशधर्मा गुरु थे जिन्होंने समाज के सभी वर्ग को स्वीकार किया। उनके प्रमुख द्वादश शिष्यों ने भी अक्षय कीर्ति कमाई।
ये बातें मानसपीठ खजुरीताल मैहर से पधारे जगदगुरु रामललाचार्य ने कहीं। वह शुक्रवार को मारवाड़ी सेवा संघ अस्सी घाट में आयोजित सप्तदिवसीय श्रीरामकथा के दूसरे दिन प्रवचन कर रहे थे। उन्होंने कहा कि माता शबरी ने भगवत दर्शन की कल्पना भी नहीं की थी, लेकिन गुरु मतंग ऋषि के विश्वास के बल से उन्हें रामजी के दर्शन हुए। भारत ऐसे अनेक श्रेष्ठतम आचायों-गुरुओं की भूमि है। कथा के अंत में मानस पोथी की आरती कर भक्तों में प्रसाद का वितरण किया गया । इस अवसर पर रामस्वरूप पाठक, पुरुषोत्तम शर्मा, मारवाड़ी सेवा संघ के नंदकिशोर बाबू, रामयश मिश्र, राजकुमारी शुक्ला, पुष्पा शुक्ला मौजूद रहीं।