फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

न्याय के मंदिर से कोई निराश होकर नहीं लौटे : जस्टिस बिंदल

विज्ञापन
विज्ञापन
इलाहाबाद हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस राजेश बिंदल ने शनिवार की सुबह 16 कक्षीय कोर्ट रूम और नौ मंजिला अदालत भवन का लोकार्पण किया। बतौर मुख्य अतिथि उन्होंने कहा कि न्यायिक व्यवस्था में सुधार पुराने मुकदमों के जल्द निस्तारण से ही संभव है। उत्तर प्रदेश बहुत बड़ा प्रदेश है और यहां पर 90 लाख केस पेंडिंग है, जो कि पूरे देश में लंबित मामलों का 20 प्रतिशत है। ऐसे में हमारा दायित्व और बढ़ जाता है। हम सब का प्रयास ऐसा हो कि न्याय के मंदिर से कोई निराश होकर नहीं लौटे, लेकिन न्याय सबकी नजर में होना चाहिए और उसमें देर नहीं होनी चाहिए। उन्होंने 20 साल पुराने लंबित केस का उदाहरण भी दिया।
विज्ञापन

सिविल कोर्ट परिसर हुए लोकार्पण समारोह के दौरान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस राजेश बिंदल ने कहा कि कोरोना काल में जिला न्यायालयों में टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में सुधार हुआ है और आगे इसमें और बढ़ोतरी होने की संभावना है। अदालतों में बुनियादी सुविधाओं पर कहा कि इंफ्रास्ट्रक्चर बहुत आवश्यक है, इस पर कार्य हो रहा है, क्योंकि इंफ्रास्ट्रक्चर अच्छा होने पर कार्य भी अच्छा होता है। कोरोना काल के समय रुके कार्यों को भी हमें प्राथमिकता देनी होगी।
अधिवक्ताओं को संबोधित करते उन्होंने कहा कि जनवरी से कचहरी परिसर से बाहर चल रही अदालतें भी इसी परिसर में संचालित होने लगेंगी। उनका प्रयास होगा कि अधिवक्ताओं द्वारा बताई गई समस्याओं को निस्तारित कर सकें। समारोह में हुए सम्मान व स्वागत से अभिभूत होकर उन्होंने कहा कि बाबा की नगरी में इस तरह का स्वागत व सम्मान पाना गौरवांवित करने वाला है।
विज्ञापन

इस अवसर पर मुख्य अतिथि व विशिष्ट अतिथि समेत अन्य अतिथियों को अंगवस्त्र व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया। समारोह में इलाहाबाद हाइकोर्ट के रजिस्ट्रार आशीष गर्ग, जिला जज डॉ. अजय विश्वेश, बार कौंसिल ऑफ इंडिया के को-चेयरमैन श्रीनाथ त्रिपाठी, यूपी बार कौंसिल के सदस्य द्वय अरुण त्रिपाठी व हरिशंकर सिंह, सेंट्रल बार अध्यक्ष अशोक उपाध्याय, बनारस बार अध्यक्ष विनोद कुमार पांडेय, महामंत्री द्वय कन्हैया पटेल व विवेक सिंह समेत कई न्यायिक अधिकारी, अधिवक्तागण व कर्मचारी उपस्थित रहे।
मंच पर बैठाए नहीं जाने से नाराज हुए वरिष्ठ अधिवक्ता
समारोह में मंच पर बैठाए नहीं जाने बार कौंसिल के सदस्य अरुण त्रिपाठी और हरिशंकर सिंह खफा हो गए। इस दौरान नारेबाजी करते हुए समारोह से बाहर चले गए। हालांकि तुरंत बाद ही मुख्य न्यायाधीश के कहने पर दोनों को मंच पर बैठाया गया। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि घर परिवार की बात है, किसी को नाराज होने की आवश्यकता नहीं है। नाराजगी भी उनका अधिकार है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें