संकट मोचन संगीत समारोह की तीसरी निशा में महाबली का दरबार अमीर खुसरो की बंदिशों से गूंज उठा। संकटमोचन के संगीत महाकुंभ में सूफियाना गीतों ने अपना रंग सभी पर चढ़ा दिया।
छाप तिलक से हनुमानजी की आराधना शुरू हुई और फिर कव्वाली की कई भावांजलियों ने श्रोताओं में उत्साह भर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत में राम वंदना करते हुए कलाकार निजामी ब्रदर्स ने कहा कि राम सिर्फ आपके नहीं हमारे भी हैं और राम हमारे हैं इसका प्रमाण है कि आज हम हनुमान के दरबार में आपके सामने हैं।
समूचा परिसर हर हर महादेव के घोष से गूंज उठा। अगली कड़ी में निजामी ब्रदर्स ने पंडित ओंकारनाथ ठाकुर के प्रिय भजन मन लागा मोरा यार फकीरी में पेश किया तो हर कोई झूम उठा।
उनकी कव्वालियों का सिलसिला सूफियाना अंदाज में जारी रहा। अपनी मंडली के साथ बैठे दोनों भाइयों ने गायन का समापन ढाई सौ वर्ष पुरानी बंदिश तेरे बिना मुझे चैन नहीं ब्रज के नंदलाल... से किया।
श्रोताओं के उत्साह को देखकर निजामी बंधुओं ने कहा कि हमें पता होता कि यहां इतने अच्छे श्रोता हैं तो हम लोग दस साल पहले ही यहां आ गए होते। इसका हम लोगों को हमेशा अफसोस रहेगा।