नीना के प्रतिनिधि के रूप में नीलकांत दुबे ने समस्त धार्मिक विधान का निर्वहन किया। पं. आशापति शास्त्री ने बताया कि नीना ने पिछले महीने अपनी रूसी शिष्या ईन्गा के माध्यम से संपर्क किया था। उन्होंने बताया कि नीना सनातन परंपरा के अनुरूप अपने पिता और युद्ध में मारे गए लोगों की आत्माओं की शांति एवं मुक्ति के लिए अनुष्ठान कराना चाहती थीं। इसी उद्देश्य से अमावस्या के दिन काशी के पिशाचमोचन तीर्थ में यह कर्मकांड कराया गया।
पं. आशापति शास्त्री के अनुसार वाग्योग चेतनापीठम् की स्थापना महामहोपाध्याय भागीरथ प्रसाद त्रिपाठी ‘वागीश शास्त्री’ ने 46 वर्ष पूर्व की थी। संस्था के माध्यम से विश्व के 80 से अधिक देशों में 50 हजार से अधिक अनुयायियों के बीच सनातन परंपरा और संस्कृति का प्रसार किया जा रहा है।