फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

NGT ने लगाई बीएचयू को लताड़: पेड़ कटाई को बताया विश्वविद्यालय की छवि पर दाग, देना होगा जुर्माना

Tue, 12 Nov 2024 03:03 PM IST
प्रगति चंद अमर उजाला नेटवर्क, वाराणसी।

सार

बीएचयू में पेड़ कटाई के मामले में एनजीटी ने विश्वविद्यालय प्रशासन को जमकर लताड़ लगई। साथ ही एनजीटी ने बीएचयू को जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया। 
विज्ञापन
BHU - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बीएचयू कैंपस में पेड़ कटाई को लेकर एनजीटी ने सख्त रुख अपनाया है। विश्वविद्यालय की छवि पर गहरा धब्बा बता दिया। नई दिल्ली में एनजीटी की चार सदस्यीय पीठ ने सात चंदन के पेड़ों सहित अन्य पेड़ों के काटे जाने के मामले में सोमवार को सुनवाई की। अब बीएचयू को जवाब देने के लिये चार सप्ताह का समय दिया गया है और अब अगली सुनवाई 4 मार्च को होगी।

विज्ञापन


ट्रिब्यूनल ने बीएचयू से कहा कि सबका जवाब आ गया, आपका नहीं। ये रवैया बहुत कैजुअल है। साथ ही डीएफओ को ये भी निर्देश दिया कि जांच करे कि जितने भी पेड़ बीएचयू में लगाए जा रहे हैं, उनकी सर्वाइवल रेट क्या है। सुनवाई के दौरान एनजीटी ने बीएचयू की जमकर लताड़ लगाई। अगर संरक्षक ही कानून का उल्लंघन करने लगे तो हमें कार्रवाई करनी होगी। पर्यावरणीय क्षति के लिए जुर्माना देना होगा।

एनजीटी ने बीएचयू के वकील से कहा कि पेड़ काटने से विश्वविद्यालय की बेहद बदनामी हुई है। जो विश्वविद्यालय छात्रों को पर्यावरण सुरक्षा के लिए शिक्षा देता हो, उसी विश्वविद्यालय में पेड़ गैरकानूनी तरीके से काटे जा रहे हैं। ऐसे ही रहा, तो सब तबाह हो जाएगा। एनजीटी के चेयरपर्सन, न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव ने कहा स्थिति यह है कि आपके पूर्व छात्र को पेड़ बचाने के लिए आना पड़ रहा है।

विज्ञापन
विज्ञापन

सफाई भी नहीं दे पाये बीएचयू के वकील

बीएचयू की ओर से रविवार को अधिवक्ता हाजिर हुए। सफाई देनी चाही तो एनजीटी ने कहा कि रिपोर्ट ने सच बता दिया है। अब कुछ कहने को बचा नहीं है। वकील ने कहा कि उन्हें जवाब देने के लिए चार सप्ताह का समय दिया जाये। ट्रिब्यूनल ने इसे स्वीकार करते हुए कहा कि सबका जवाब तो आ गया, लेकिन आपका जवाब नहीं आया। ये दिखाता है कि आप कितने कैजुअल हैं।

बीएचयू के प्रो. रामदेव ने बताया पर्यावरण विज्ञान
एनजीटी के अफरोज अहमद ने कहा कि प्रो. रामदेव मिश्रा जैसे जाने-माने विद्वान बीएचयू के थे और दुनिया में पर्यावरण विज्ञान को बताया और वहां पेड़ काटे जा रहे। बीएचयू इतना हरा-भरा कैंपस है। एजीटी ने कमेटी की रिपोर्ट को संज्ञान में लेते हुए कहा कि पेड़ कटाई हुई है। 12 पेड़ों की कटाई को लेकर रजिस्ट्रार पर दर्ज किए गए मुकदमे को सही माना है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें