बनारस में गंगा की सहायक नदी असि व वरुणा में अतिक्रमण व प्रदूषण को लेकर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) द्वारा 4 अगस्त के पहले मांगी गई एक्शन टेकिंग रिपोर्ट नमामि गंगे जमा नहीं कर सकी। जिसके बाद एनजीटी द्वारा मामले की अगली सुनवाई की तारीख 24 अगस्त मुकर्रर की गई है।
एनजीटी द्वारा 17 जून के फैसले में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नमामि गंगे व जिलाधिकारी वाराणसी की अगुवाई में स्वतंत्र निगरानी समिति का गठन किया गया था। समिति के समन्वयक की जिम्मेदारी उत्तर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को दी गई थी, जबकि मामले में कार्रवाई की रिपोर्ट नमामि गंगे को जमा करनी थी।
अपने अंतरिम आदेश में एनजीटी ने असि व वरुणा के बाढ़ मैदानी क्षेत्र का सीमांकन व असि व वरुणा नदी के कायाकल्प व जीर्णोद्धार करने का आदेश दिया था। साथ ही साथ अतिक्रमण हटाने का भी निर्देश दिया था। वर्तमान सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में जरूरत के अनुसार परिवर्तन का आदेश दिया था। साथ ही साथ एनजीटी ने अंतरिम आदेश में ललिता घाट के सामने गंगा में बन रहे प्लेटफॉर्म का भी जिक्र किया था। एनजीटी ने इस कार्य में नदी विशेषज्ञ को भी स्वतंत्र निगरानी समिति में रखने का सुझाव दिया था। जिसकी मांग सौरभ तिवारी द्वारा एनजीटी से की गई थी।