वाराणसी के ज्ञानवापी प्रकरण में प्रभारी जिला जज की अदालत ने सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड की निगरानी याचिका स्वीकार किए जाने के मुद्दे पर अवर अदालत की पत्रावली के साथ जिला जज की अदालत में लंबित अंजुमन इंतजामिया मसाजिद कमेटी की निगरानी याचिका 15 अक्तूबर को तलब की है। जिला जज के अवकाश पर रहने के कारण यह मामला प्रभारी जिला जज अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम राजीव कमल पांडेय की अदालत में मंगलवार को पेश हुआ था।
प्राचीन मूर्ति स्वयंभू लार्ड विश्वेश्वर से जुड़े इस प्रकरण में सेंट्रल सुन्नी वक्फ बोर्ड ने यह कहते हुए निगरानी याचिका दाखिल की है कि अवर न्यायालय को ज्ञानवापी प्रकरण की सुनवाई का अधिकार नहीं है। मियाद अधिनियम के तहत विलंब से याचिका देने पर तीन हजार रुपये का जुर्माना लगाते हुए जिला जज ने इसे स्वीकार किया था।
वहीं, श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर के वाद मित्र और वादी हरिहर नाथ त्रिपाठी के अधिवक्ता अमरनाथ शर्मा की दलील है कि दीवानी प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत अवर न्यायालय के अंतरिम आदेश के खिलाफ निगरानी याचिका नहीं दाखिल की जा सकती है।