सीएचसी मिसिरपुर - ऑक्सीजन प्लांट को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी की ओर से चलाया जाता है। चिकित्सा अधीक्षक डाॅ. आर बी सिंह ने बताया कि यहां कोई टेक्नीशियन नहीं है।
सीएचसी नरपतपुर - तीन साल पहले लगे ऑक्सीजन प्लांट को चलाने के लिए स्थायी टेक्नीशियन नहीं मिल सका। एक अन्य कर्मचारी से काम चलाया जा रहा है।
शास्त्री अस्पताल रामनगर - अस्पताल परिसर में दो ऑक्सीजन प्लांट लगे थे। इसमें से एक खराब हो गया है।
सीएचसी आराजीलाइन - यहां का ऑक्सीजन प्लांट सिर्फ शोपीस बना हुआ है। जब से लगा तब से चला ही नहीं।
सीएचसी गंगापुर - ऑक्सीजन प्लांट लगा हुआ है। दो महीने पहले जांच करवाई गई थी। कोई स्थायी कर्मचारी नहीं है।
कोविड के दाैरान बने थे 750 वेंटिलेटर वाले बेड
2022 में कोरोना वायरस की लहर के दौरान जिले में खास तैयारियां की गईं थीं। बीएचयू, जिला अस्पताल, मंडलीय, शास्त्री अस्पताल रामनगर और 50 से अधिक निजी अस्पतालों को मिलाकर कोरोना के मरीजों के लिए करीब 3500 बेड रिजर्व कराए गए थे। इसमें 750 बेड आईसीयू और वेंटिलेटर वाले थे।
काशी में रोज आते हैं करीब 2 लाख लोग
वाराणसी की आबादी इस समय करीब 42 लाख है। जबकि जिला प्रशासन के अनुसार बसों, ट्रेनों, फ्लाइट और निजी साधनों से रोज करीब 2 लाख लोग आते हैं। कोविड के समय जिले की सीमाएं सील थीं।
एयरपोर्ट से लेकर स्टेशन तक स्क्रीनिंग की तैयारी
कोरोना के केस देश में बढ़ने के बाद स्वास्थ्य महकमा अलर्ट पर है। सीएमओ डाॅ. संदीप चौधरी ने बताया कि कोरोना संक्रमण से बचाव को लेकर सभी संसाधन हैं। जिला अस्पताल, मंडलीय अस्पताल, शास्त्री अस्पताल से लेकर बीएचयू तक जरूरत पड़ने पर अलग वार्ड बनाया जाएगा।
शासन के निर्देश पर एयरपोर्ट से लेकर स्टेशन तक स्क्रीनिंग करने संबंधी तैयारी भी पूरी है। जहां तक ऑक्सीजन प्लांट के चलाए जाने के लिए टेक्नीशियन की तैनाती की बात है तो स्वास्थ्य केंद्रों पर इसके लिए कर्मचारी को प्रशिक्षण दिया गया है।