ईएमआई के मैसेज से बढ़ता है तनाव
मंडलीय अस्पताल की मनोरोग चिकित्सक डॉ. उपासना बताती हैं कि जश्न के बाद जैसे ही ईएमआई के मेसेज और मासिक किस्तों का हिसाब सामने आता है, तनाव बढ़ने लगता है। युवाओं को लगातार यह चिंता रहती है कि पैसे कैसे मैनेज होंगे। कई बार रात में नींद भी नहीं आती और काम की एकाग्रता प्रभावित होती है। लंबे समय तक फाइनेंशियल स्ट्रेस रहने से चिड़चिड़ापन, मूड स्विंग और पछतावे की भावना भी उभर सकती है।
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केस–1
लल्लापुरा के रहने वाले 20 वर्षीय युवक ने पढ़ाई पूरी करने के बाद मार्केटिंग की नौकरी शुरू की। नए साल के सेलिब्रेशन के लिए उसने एक एप से 20 हजार रुपये का लोन लिया। नाइट पार्टी में 18 हजार रुपये खर्च कर दिए। अब युवक को अगले माह से शुरू होने वाली ईएमआई की चिंता सताने लगी है।
केस–2
रामनगर में एमबीए की पढ़ाई कर रहे 21 वर्षीय युवक ने ऑनलाइन एप से 15 हजार रुपये का लोन लिया। सेलिब्रेशन में 15 हजार रुपये के साथ पांच हजार रुपये अपनी जेब से खर्च कर दिए। अब उसे अगले छह महीने तक हर महीने तीन हजार रुपये ईएमआई जमा करनी होगी।
- होटल बुकिंग - 2.83 करोड़
- डिनर / लंच - 1.37 करोड़
- ऑनलाइन फूड - 1.17 करोड़
- ड्रिंक - 58 लाख
- कुल खर्च - 5.95 करोड़
क्या बोले बिजनेस एडवाइजर
कर्ज लेकर सेलिब्रेशन में खर्च करना भविष्य के लिए नुकसानदायक है। किसी भी काम को करने से पहले फाइनेंशियल प्लानिंग सबसे जरूरी है। बिना तैयारी के लोन लेने से बजट बिगड़ जाता है। ये सुविधाएं तुरंत राहत देती हैं, लेकिन बाद में किस्तों का बोझ बढ़ा देती हैं। -मनीष सिंह, बिजनेस एडवाइजर