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बनारस में नेताजी सुभाष चंद्र बोस का मंदिर, भारत माता की प्रार्थना से खुलते हैं कपाट, जानें इसके बारे में

Sat, 23 Jan 2021 03:02 PM IST
गीतार्जुन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, वाराणसी
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लमही में नेताजी सुभाष चंद्र बोस का मंदिर। - फोटो : अमर उजाला
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दुनिया भर के भारतवंशियों और नेताजी के चाहने वालों की आस्था का केंद्र वाराणसी के लमही में स्थित नेताजी सुभाष चंद्र बोस का मंदिर है। विश्व का इकलौता मंदिर जहां कपाट भारत माता की प्रार्थना से खुलते हैं और सुभाष आरती के बाद कपाट बंद होते हैं। मंदिरों के शहर काशी में नेताजी राष्ट्रदेवता के रूप में पूजे जाते हैं। दुनिया के 15 देशों के सुभाषवादियों ने इस मंदिर में अपनी आस्था जताई है।

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लमही के इंद्रेश नगर में सुभाष मंदिर क्रांति, शांति, शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा के आध्यात्मिक दर्शन के आधार पर बनाया गया है। सुभाष मंदिर 11 फीट ऊंचा है। मंदिर की सीढ़ियां लाल रंग की हैं, सीढ़ियों से चढ़कर आधार चबूतरा सफेद रंग का है। मूर्ति काले रंग की है और छत्र स्वर्ण के रंग का है। लाल रंग अर्थात क्रांति का रंग, क्रांति की सीढ़ियों पर चढ़कर ही सफेद रंग का आधार अर्थात् शांति का आधार तैयार किया जा सकता है। शांति के आधार पर ही शक्ति की पूजा होती है। मूर्ति काले ग्रेनाइट की बनी है। काला रंग शक्ति का प्रतीक है, शक्ति की पूजा से सकारात्मक ऊर्जा (सुनहरा छत्र) निकलती है।

मंदिर की स्थापना करने वाले बीएचयू के इतिहास विभाग के प्रो. डॉ. राजीव श्रीवास्तव ने बताया कि छुआछूत, धर्म, जाति, रंग, लिंग, भाषा के भेद को खत्म करने, सांप्रदायिक एकता स्थापित करने एवं देशभक्ति का पाठ पढ़ाने के उद्देश्य से की थी। महिलाएं, पुरुष, किन्नर सभी यहां पर दर्शन करने आते हैं।

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प्रार्थना और आरती
सुभाष मंदिर सुबह 7 बजे भारत माता की प्रार्थना के साथ खुलता है और शाम 7 बजे से पहले आजाद हिंद सरकार का राष्ट्रगान गाया जाता है। फिर पांच बार राष्ट्रदेवता को जय हिंद के साथ सलामी दी जाती है, बाद में महाआरती होती है। आरती के बाद सभी दर्शनार्थी मंदिर के पुजारी खुशी, रमन भारतवंशी का पैर छूकर आशीर्वाद लेते हैं। राष्ट्रदेवता को दंडवत करते हैं और मंदिर के संस्थापक डॉ. राजीव श्रीवास्तव को दंडवत प्रणाम करते हैं। आरती और प्रसाद पाने के बाद मंदिर का पट बंद कर दिया जाता है।

मंदिर में है दलित महिला पुजारी 
जातिगत भेदभाव को खत्म करते हुए मंदिर के संस्थापक डॉ. राजीव श्रीवास्तव ने दलित परिवार की होनहार बेटी खुशी रमन भारतवंशी को पूरे विधि विधान से पुजारी नियुक्त कराया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के इंद्रेश कुमार, महंत बालक दास, अयोध्या श्रीराम पीठ के मुख्य महंत शंभू देवाचार्य के साथ 21 वैदिक ब्राह्मणों ने सुभाष मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा कराई। खुशी रमन चिल्ड्रेंस पार्लियामेंट की स्पीकर रह चुकी हैं और हाई स्कूल की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण किया है।
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मनाया जाता है सुभाष महोत्सव
नेताजी के जन्मोत्सव को 21 जनवरी से 26 जनवरी तक सुभाष महोत्सव के रूप में मनाया जाता है। नेता जी में आस्था रखने वाले लोग देश-विदेश से दर्शन करने आते हैं। सुभाषवादियों के लिए यह मंदिर तीर्थ है। 21 अक्तूबर को आजाद हिंद सरकारी के  स्थापना दिवस पर प्रत्येक वर्ष सुभाष मंदिर में विशेष दर्शन होता है।
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