प्रार्थना और आरती
सुभाष मंदिर सुबह 7 बजे भारत माता की प्रार्थना के साथ खुलता है और शाम 7 बजे से पहले आजाद हिंद सरकार का राष्ट्रगान गाया जाता है। फिर पांच बार राष्ट्रदेवता को जय हिंद के साथ सलामी दी जाती है, बाद में महाआरती होती है। आरती के बाद सभी दर्शनार्थी मंदिर के पुजारी खुशी, रमन भारतवंशी का पैर छूकर आशीर्वाद लेते हैं। राष्ट्रदेवता को दंडवत करते हैं और मंदिर के संस्थापक डॉ. राजीव श्रीवास्तव को दंडवत प्रणाम करते हैं। आरती और प्रसाद पाने के बाद मंदिर का पट बंद कर दिया जाता है।
मंदिर में है दलित महिला पुजारी
जातिगत भेदभाव को खत्म करते हुए मंदिर के संस्थापक डॉ. राजीव श्रीवास्तव ने दलित परिवार की होनहार बेटी खुशी रमन भारतवंशी को पूरे विधि विधान से पुजारी नियुक्त कराया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के इंद्रेश कुमार, महंत बालक दास, अयोध्या श्रीराम पीठ के मुख्य महंत शंभू देवाचार्य के साथ 21 वैदिक ब्राह्मणों ने सुभाष मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा कराई। खुशी रमन चिल्ड्रेंस पार्लियामेंट की स्पीकर रह चुकी हैं और हाई स्कूल की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण किया है।
मनाया जाता है सुभाष महोत्सव
नेताजी के जन्मोत्सव को 21 जनवरी से 26 जनवरी तक सुभाष महोत्सव के रूप में मनाया जाता है। नेता जी में आस्था रखने वाले लोग देश-विदेश से दर्शन करने आते हैं। सुभाषवादियों के लिए यह मंदिर तीर्थ है। 21 अक्तूबर को आजाद हिंद सरकारी के स्थापना दिवस पर प्रत्येक वर्ष सुभाष मंदिर में विशेष दर्शन होता है।