नेपाल के प्रधानमंत्री का भारत दौरा राजनीतिक संबंधों के साथ ही धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से दोनों देशों को और मजबूत कर गया। शेर बहादुर देउबा ने पशुपतिनाथ और विश्वनाथ के रिश्तों को प्रगाढ़ किया तो गंगा से बागमती की डोर भी जोड़ी। भारत और नेपाल के सदियों पुराने मजबूत रिश्तों पर पड़ी धूल के हटने से चीन के नेपाल कार्ड पर भी भविष्य में असर दिखेगा।
बीएचयू राजनीतिक शास्त्र विभाग के प्रोफेसर और अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार तेज प्रताप सिंह ने नेपाल के पीएम के भारत और काशी यात्रा के राजनीतिक और सांस्कृतिक निहितार्थ बताए। उन्होंने कहा कि दोनों देश के बीच सिर्फ भौगोलिक बंटवारा है। जबकि दोनों देशों के बीच रोटी और बेटी का रिश्ता है। दोनों देशों की संस्कृति और धर्म एक जैसे हैं। शेर बहादुर देउबा के भारत और आध्यात्मिक, धार्मिक नगरी काशी के यात्रा से दोनों देशों के आत्मीय संबंध और प्रगाढ़ होंगे।
विश्वनाथ और पशुपतिनाथ के रिश्ते पुरातन रिश्तों की गवाही देता है। गोरखनाथ मंदिर से नेपाल के रिश्ते भी सदियों पुराने हैं। इसकी मिसाल नेपाल के पीएम के काशी यात्रा में योगी आदित्यनाथ के पूरे समय साथ रहने से भी दिखा। मकरसंक्रांति पर गोरखनाथ मंदिर में चढ़ने वाली खिचड़ी भी नेपाल के राजघराने से ही आती है।