मरीजों को हौती है दिक्कत
इस पर जांच लिखने वाले डॉक्टर के नाम के साथ ही उनकी मुहर भी लगती है। इसके बाद मरीज सीसीआई लैब में बने काउंटर पर जांच की फीस जमा कर उसकी रसीद लेते हैं। खास बात यह है कि सैंपल निकालने और जमा करते समय लैब के काउंटर पर बैठे कर्मचारी भी मरीज से जांच की फीस जमा वाली रसीद देखकर ही आगे की कार्रवाई शुरू करते हैं। इसी पर घेरा लगाकर मरीजों को रिपोर्ट लेने आने के समय उसको लेकर आने को कहा जाता है।
केस - 1
नेफ्रोलॉजी विभाग की ओपीडी में डॉक्टर को दिखाने आईं गाजीपुर की मरीज माया को डॉक्टर ने सीबीसी, एलएफटी, आरएफएटी सहित अन्य जांच लिखी। 26 सितंबर को जो रिपोर्ट मिली, उस पर डॉक्टर का नाम नहीं लिखा था। यहीं शुल्क की रसीद के आगे भी एनए यानी नाट एप्लीकेबल लिखा।
केस - 2
हृदय रोग विभाग में दिखाने आए जौनपुर निवासी मरीज शिवपाल ने डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने सीबीसी, एलएफटी, आरबीएस, आरएफटी, इलेक्टो आदि जांच लिखी। 03 अक्तूबर को मिली रिपोर्ट में डॉक्टर का नाम नहीं था। रसीद यानी फीस जमा करने की जगह एनए यानी नाट एप्लीकेबल लिखा था।
बोले अधिकारी
नियमानुसार ओपीडी या वार्ड से जो फाॅर्म भरकर दिया जाता है, उस पर डॉक्टर का नाम होना चाहिए। जहां तक रिपोर्ट में रसीद के आगे एनए यानी नाट एप्लीकेबल लिखा आ रहा है, ऐसा क्यों हो रहा है, इसको दिखवाया जा रहा है। - प्रो. एसपी मिश्रा, प्रभारी, सीसीआई लैब, बीएचयू