त्रिपुरा में मेडीकल स्टोर चलाने वाले गोपाल ने बताया कि पुत्री का एमबीबीएस में एडमिशन कराने के लिए त्रिपुरा के ही प्रदीप्त भट्टाचार्य और मृत्युंजय देवनाथ से संपर्क किया था। इन लोगों ने पटना निवासी नीलेश उर्फ पीके और केजीएमयू के छात्र डॉ. ओसामा शाहिद के माध्यम से सॉल्वर बिठाकर परीक्षा पास कराने का दावा किया। इसके लिए 50 लाख में सौदा तय हुआ था।
बतौ एडवांस में 5 लाख रुपये प्रदीप्त, मृत्युंजय और नीलेश उर्फ पीके के बैंक खाते में जमा किया था। पुत्री के स्थान पर सॉल्वर के रूप में परीक्षा दिलाने के लिए पटना की रहने वाली बीएचयू छात्रा जूली कुमारी की फोटो को मिक्स कराकर फॉर्म भरवाया गया था।
पुलिस आयुक्त ए सतीश गणेश ने बताया कि 12 सितंबर को सारनाथ स्थित केंद्र से अभ्यर्थी के स्थान पर परीक्षा दे रही सॉल्वर गैंग की सदस्य और जूली कुमारी को गिरफ्तार किया गया था। गिरोह में शामिल जूली की मां, भाई, दोस्त, मास्टरमाइंड सहित त्रिपुरा की रहने वाली अभ्यर्थी और उसका पिता गोपाल विश्वास समेत तेरह आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है।
पुलिस की पूछताछ में गोपाल विश्वास ने बताया कि आस-पड़ोस व परिजनों को यह विश्वास दिलाने के लिए कि उनकी पुत्री ने ही नीट की परीक्षा दी है, इसके लिए प्रदीप्त भट्टाचार्य, मैं और पुत्री नौ सितंबर को एयर इंडिया की फ्लाइट से अगरतला से दिल्ली गए, जबकि उनकी पुत्री की नीट परीक्षा वाराणसी में थी।
तीन दिनों तक दिल्ली में विभिन्न स्थानों पर घूमने के बाद 13 सितंबर की सुबह दिल्ली से वापस एयर इंडिया की फ्लाइट से अगरतला, त्रिपुरा पहुंचे थे। वापस पहुंचने पर जूली कुमारी के पकड़े जाने की सूचना प्रदीप्त और मृत्युंजय के माध्यम से मिली थी।
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