इससे पहले उनके बेटे नीरज शेखर भाजपा में शामिल हो जाएंगे। वैसे नीरज शेखर के सपा छोड़ने और राज्य सभा सांसद पद से इस्तीफा देने की अटकलें उसी दिन से शुरू हो गई थीं जिस दिन सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने नीरज शेखर का बलिया से टिकट काटकर सनातन पांडेय को दे दिया था। इसके बाद से नीरज शेखर के समर्थकों ने भी खुले तौर से सपा से किनारा करते हुए भाजपा के साथ जाने का एलान कर दिया था।
लोकसभा चुनाव के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री के राजनीतिक सलाहकार रहे एचएम शर्मा ने भी इस दौरान वीरेंद्र सिंह मस्त के पक्ष में पत्रकार वार्ता की थी और भाजपा को वोट देने की अपील की थी। ताजा घटनाक्रम भी उसी घटनाक्रम का हिस्सा माना जा रहा है। नीरज शेखर का इस्तीफा देना उनकी साफ तौर पर उनकी अखिलेश यादव और पार्टी नेतृत्व के प्रति नाराजगी को व्यक्त करता है।
बता दें कि, पिता चंद्रशेखर की मौत के बाद नीरज शेखर ने पहली बार वर्ष 2007 में चुनाव लड़ा था। वे बलिया की सीट से चुनाव जीत कर संसद में पहुंचे थे। उन्होंने इस उपचुनाव में करीब तीन लाख वोटों से जीत हासिल की थी। इसके बाद 2009 के आम चुनावों में भी उन्होंने इस सीट पर अपना कब्जा बरकरार रखा था। हालांकि साल 2014 में बीजेपी प्रत्याशी भरत सिंह ने नीरज शेखर को इस सीट से चुनाव में मात दे दी थी।