अष्टमी तिथि की तरह ही नवरात्रि में नवमी तिथि का भी विशेष महत्व माना गया है। महानवमी तिथि की पूजा बृहस्पतिवार को रवियोग में की जाएगी। नवमी तिथि 14 अक्तूबर को रात 9.27 तक रहेगी। ज्योतिषाचार्य डॉ. गणेश प्रसाद मिश्र ने बताया कि इस दिन मां दुर्गा के नौ स्वरूप की प्रतीक नौ कन्याओं और एक बालक को भी आमंत्रित कर बटुक भैरव का स्वरूप अपने घर आमंत्रित करके पूजन किया जाना चाहिए।
साथ ही अगर देवी सरस्वती की स्थापना की हो तो उनका विसर्जन नवमी को किया जा सकता है। ये मन्वादि तिथि होने से इस दिन श्राद्ध का भी विधान है। इस तिथि पर सुबह जल्दी स्नान कर के दिनभर श्रद्धानुसार दान करने की परंपरा है।
दुर्गा पूजा के बाद मूर्तियों के विसर्जित के लिए लिए खिड़किया घाट और रामनगर सामनेघाट के समीप विसर्जन कुंड बनेगा। जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने दोनों जगहों पर समय से कुंड निर्माण के निर्देश दिए हैं। उन्होंने नगर निगम को कुंड बनाने की जिम्मेदारी सौंपी है।
शहर में लगभग ढाई सौ से अधिक प्रतिमाओं को स्थापित किया गया है। नवरात्र पूजन के बाद नगर निगम ने विसर्जन के लिए तैयारियां भी शुरू कर दी हैं। गंगा सरोवर के अलावा शहर में पहले से विसर्जन के लिए चिह्नित कुंडों पर तैयारियां की जा रही हैं।
माता की प्रतिमाओं का विसर्जन 15 और 16 अक्तूबर को किया जाएगा। पूजा समितियां प्रतिमा और कलश का विसर्जन करेंगी। केंद्रीय पूजा समिति के अध्यक्ष तिलकराज मिश्र ने बताया कि दशमी तिथि में माता की प्रतिमाओं का विसर्जन होगा।
शारदीय नवरात्र की अष्टमी पर काशी में उल्लास के रंग बिखरे। शाम से पंडाल और गलियां रंग-बिरंगी रौशनी से दमक उठीं। शंख ध्वनि, ढाक की थाप और घंटा-घड़ियाल से माता की आराधना के स्वर गूंजते रहे। बुधवार को शाम ढलते ही शहर के पंडालाें में लोगों की चहल-पहल बढ़ी तो रौनक नजर आने लगी। कोरोना संक्रमण काल के कारण पंडालों में भव्यता तो नहीं है, लेकिन आस्था का रेला देर रात तक उमड़ता रहा।