देवी भागवत पुराण के अनुसार मां चामुंडा और महिषासुर के बीच में भयंकर युद्ध हो रहा था। उस समय चंड और मुंड नाम के दो राक्षसों ने माता की पीठ पर वार कर दिया था, इसके बाद माता का मुख क्रोध के कारण नीला पड़ गया और माता ने दोनों राक्षस का वध कर दिया था। दोनों राक्षसों का वध संधि काल में हुआ था और यह मुहूर्त बेहद सिद्धि कारक और शक्तिशाली माना जाता है।
संधि पूजा का शुभारंम घंटी बजाकर होता है। मां की संधि पूजा में 108 दीपक, 108 कमल, 108 बेल के पत्ते, गहने, पारंपरिक कपड़े, गुड़हल के फूल, चावल अनाज (बिना पके) और एक लाल फल व माला का उपयोग कर मां दुर्गा का शृंगार किया जाता है। इसके बाद मां दुर्गा के मंत्रों का जाप करके उनकी आरती उतारी जाती है।