सिर्फ इन खेलों के हैं कोच
जिला स्टेडियम में तीरंदाजी का हॉस्टल है। इस खेल के लिए महिला और पुरुष प्रशिक्षकों के साथ खेलो इंडिया के तहत भी एक प्रशिक्षक नियुक्त है। इसके अलावा एथलेटिक्स, फुटबॉल, वॉलीबॉल और वेटलिफ्टिंग के एक-एक कोच हैं। वहीं कुश्ती, कबड्डी, खो-खो, बैडमिंटन, क्रिकेट, बास्केटबॉल, टेबल टेनिस और जूडो-कराटे के लिए मैदान व कोर्ट होने के बावजूद प्रशिक्षक नहीं हैं। इन खेलों के कोच की मांग हर साल निदेशालय को भेजी जाती है, लेकिन अब तक नियुक्ति नहीं हो सकी है।
सात साल से मिल रहा आश्वासन
हॉकी खिलाड़ियों की समस्या भी लंबे समय से बनी हुई है। करीब सात साल से खिलाड़ी चुर्क में पहाड़ी को समतल कर बनाए गए अस्थायी मैदान पर अभ्यास कर रहे हैं। जिला खेल समिति के सदस्य रहे स्वदीप श्रीवास्तव और हॉकी खिलाड़ी अमरजीत यादव के मुताबिक, कई बार हॉकी स्टेडियम की मांग उठाई जा चुकी है। वर्ष 2019 से पहले खिलाड़ी एक निजी कंपनी के परिसर में अभ्यास करते थे।
प्रबंधन की आपत्ति के बाद जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से हॉकी मैदान उपलब्ध कराने की मांग की गई। मैदान बनाने की पहल भी हुई, लेकिन मामला आगे नहीं बढ़ सका। समतल और मानक के अनुरूप मैदान नहीं होने से खिलाड़ियों को अभ्यास के दौरान परेशानी होती है। एनआईएस कोच दिग्विजय सिंह ने बताया कि जिले में हॉकी के कई प्रतिभावान खिलाड़ी हैं, लेकिन उचित मैदान नहीं होने से उनकी प्रतिभा प्रभावित हो रही है।
चुर्क में पहाड़ी पर हॉकी खेलते खिलाड़ी।
- फोटो : संवाद
पहाड़ी मैदान पर चोटिल हो जाते हैं खिलाड़ी
जिले में हॉकी के कई प्रतिभावान खिलाड़ी हैं, लेकिन सुविधाओं के अभाव में वे निखर नहीं पा रहे हैं। पहाड़ी पर खेलते समय खिलाड़ी कई बार चोटिल हो जाते हैं, जिसके बाद उन्हें खेल से दूरी बनानी पड़ती है। - सुमित रावत, नेशनल खिलाड़ी।
सही मार्गदर्शन और सुविधा की जरूरत
हॉकी के लिए जिले में भरपूर संभावनाएं हैं। जरूरत केवल खिलाड़ियों को सही मार्गदर्शन और सुविधाएं उपलब्ध कराने की है। मानक के अनुरूप मैदान मिलने से खिलाड़ियों को काफी मदद मिलेगी। यहां के खिलाड़ी आगे तक जाने में सक्षम हैं। - अविनाश यादव, नेशनल खिलाड़ी।
ग्रामीण क्षेत्रों में खेलों को बढ़ावा देना जरूरी
स्पोर्ट्स हॉस्टल आने के बाद पता चला कि ग्रामीण क्षेत्रों में खेलों को प्रोत्साहित करना कितना जरूरी है। सुविधाओं के अभाव में खिलाड़ी आगे नहीं बढ़ पाते। दूसरे राज्यों में खेलों को लेकर अलग तरह का उत्साह है। सुविधा और प्रोत्साहन मिलने पर खिलाड़ी बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। - महिमा रावत, हॉकी खिलाड़ी।
बास्केटबॉल के लिए एक सिंथेटिक समेत दो कोर्ट हैं। पूर्व में यहां कोच भी रहे हैं। फिलहाल स्टेडियम में पांच खेलों के प्रशिक्षक हैं। अन्य खेलों के लिए निदेशालय से कोच की मांग की गई है। जल्द नियुक्ति होने की उम्मीद है। खेलों के विकास के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। खेल संघों के समन्वय से प्रतियोगिताएं भी आयोजित कराई जा रही हैं। - शमीम अहमद, जिला खेल अधिकारी।