मगर कोरोना काल में 10 लीटर दूध खपा पाना मुश्किल हो गया है। हालांकि घर चलाने के लिए यही आमदनी का एक मात्र साधन है। जिससे माता पिता, पांच भाई और एक बहन का खर्च चल रहा है।
विकास के अलावा उनके छोटे भाई पवन यादव भी हैं, जो इटावा के साई सेंटर में तीन साल से रह रहे थे। जहां खेल के साथ खाने रहने सुविधा थी। मगर कोरोना के कारण पवन को भी सेंटर छोड़ना पड़ा। अब पवन भी अपने भाई के साथ ही चाय की दुकान पर हाथ बंटाते हैं। जबकि की सभी छोटे भाई और एक बहन पढ़ाई लिखाई करते हैं।
विकास ने बताया कि वो सिगरा स्टेडियम में कुश्ती के प्रशिक्षक गोरख यादव के निगरानी में अभ्यास किया करते थे। जो अब बंद है। वहीं छोटा भाई पवन साई सेंटर में था। जहां उसे सरकार की तरफ सभी सुविधाएं मिलती थीं। अब उसे भी कोई सुविधा नहीं मिल रही।