सर्व विद्या की राजधानी में नई शिक्षा नीति पर आयोजित राष्ट्रीय शिक्षा सम्मेलन में शिक्षा जगत की नई राह प्रशस्त होगी। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय व यूजीसी के संयुक्त तत्वावधान में सात जुलाई को आयोजित शिक्षा सम्मेलन में देश भर के शिक्षाविद और कुलपति भी शामिल होंगे। संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में सम्मेलन की तैयारियों के लिए बैठक आयोजित हुई।
कुलपति प्रो. हरेराम त्रिपाठी ने बताया कि सात जुलाई को कुलपतियों, निदेशकों एवं विद्यार्थियों के साथ विचार विमर्श के लिये एक सम्मेलन आयोजित किया गया है। इसका उद्घाटन देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। इस सम्मलेन के संयोजक यूजीसी ने प्रतिभाग के लिये इस संस्था के 35 अध्यापकों एवं 15 प्रबुद्ध शोधार्थियों को भी आमंत्रित किया है।
कुलपति प्रो. त्रिपाठी ने बताया कि नई शिक्षा नीति पर राष्ट्रीय शिक्षा सम्मेलन के आयोजन पर विस्तृत परिचर्चा की गई। इस आयोजन से संस्कृत भाषा को मजबूती मिलेगी, संस्कृत आधुनिक विज्ञान की भाषा है। संस्कृत भाषा को रोजगार से जोड़ा जाना चाहिए। देश के सांस्कृतिक, आध्यात्मिक, धार्मिक, दार्शनिक, ऐतिहासिक और सामाजिक जीवन का विकास संस्कृत जनभाषा के रूप में विकसित होने पर ही संभव है। संस्कृत वस्तुत: हमारी संस्कृति का मेरुदंड है।