नासा के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. ओम प्रकाश पांडेय
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बीएचयू भारत अध्ययन केंद्र व मालवीय भवन के संयुक्त तत्वावधान में शनिवार को मालवीय भवन में नासा के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. ओम प्रकाश पांडेय का व्याख्यान हुआ।
‘सृष्टि रहस्य : बौद्धिक विज्ञान और अद्यतन विज्ञान की दृष्टि’ पर व्याख्यान देते हुए कहा कि वैदिक काल से ही भारतीय काल गणना पद्धति पाश्चात्य काल की गणना से अधिक समृद्ध रही है। वैदिक ऋषियों ने सबसे पहले पृथ्वी को अपने मंत्रों में गोल बताया, इसके बाद कोपरनिकस ने पृथ्वी को गोल घोषित किया।
उन्होंने कहा कि वैदिक मंत्रों में पृथ्वी को पूरब दिशा की ओर से घूमता बताया गया है और छह के आगे चौबीस शून्य लगाने पर पृथ्वी का वजन मालूम हो जाता है।
बताया कि पृथ्वी के झुकाव, ग्लोबल वार्मिंग, हिमयुग, सूर्य की परिक्रमा के काल गुरुत्वाकर्षण आदि का प्रमाण भी वैदिक मंत्रों में मिलता है। विडंबना है कि इसे आज गलत तरीके से पाश्चात्य वैज्ञानिकों की खोज में रूप में पढ़ाया जा रहा है।
पूर्व वैज्ञानिक ने बताया कि वेदों में सूर्य से पृथ्वी की दूरी, पृथ्वी का अपनी धुरी पर झुकाव का सटीक माप मिलता है। अध्यक्षता बीएचयू के इमेरिटस प्रोफसर हृदय रंजन शर्मा ने की