यूपी के बलिया जिले के द्वाबा क्षेत्र के पूर्वी छोर पर स्थित गंगा व घाघरा के मध्य नरहरिपूरी में स्थित श्री नरहरि धाम मठ है। इस स्थान का वर्णन श्री बाल्मीकि रामायण में किया गया है। जिसमें यह कहा गया है कि यह स्थान कभी भगवान शिव की तपोस्थली रहा है। वहीं विश्वामित्र जब श्री राम व लक्ष्मण जी के साथ जनकपुर की यात्रा करते हैं तो उसी बीच यहां मठ पर एक रात विश्राम करते हैं और पूरी रात सत्संग में बीत जाता है।
सुबह उठकर हवनात्मक कार्य कर मठ के पूर्वी छोर पर गंगा व सरयू नदी के संगम वाले जगह पर नदी पार करते हैं और नदी पार करते वक्त राम और लक्ष्मण को इन नदियों के विषय में जानकारी देते हैं । उसी समय से यह स्थान द्वाबा का बाबा धाम कहा जाता है ।
इस वर्ष भी श्रद्धालुओं के भीड़ की संभावना से यहां के स्वयं सेवकों ने भी बैठक कर भीड़ नियंत्रण की रणनीति बनाई है। इस धाम के परम पूज्य संत दीनबंधु दीनानाथ उर्फ वाराणसी बाबा ने एक बातचीत में इस स्थान की महिमा का वर्णन भी अपने मुखारबिंद से किया ।
उन्होंने कहा कि ऐसे बहुत कम स्थान मिल पाते हैं, जहां दो-दो नदियों की धारा बहती हो । यह स्थल हर मायने में अपना अहम स्थान रखता है । सावन माह की महता पर व्यापक प्रकाश डालते हुए मठ के मठाधीश श्री बनारसी दास बाबा ने कहा कि सावन का महीना हर किसी के लिए फलदायी सिद्ध होता है ।
भगवान शंकर ने स्वयं अपने श्री मुख से ब्रह्माजी के मानस पुत्र सनतकुमार से सावन मास की महिमा इस प्रकार बताई थी । मेरे तीन नेत्रों में सूर्य दाहिने, चंद्र वाम तथा अग्नि मध्य नेत्र हैं। सावन के महीने में आनेवाला प्रत्येक सोमवार, फिर हर महीने आनेवाली शिवरात्रि और सोमवार का महत्व है, किंतु भगवान को सावन यानी श्रावण का महीना बेहद प्रिय है।
जिसमें वह अपने भक्तों पर अतिशय कृपा बरसाते हैं। ऐसी मान्यता है कि इस महीने में खासकर सोमवार के दिन व्रत-उपवास और पूजा पाठ रुद्राभिषेक, कवच, पाठ जाप इत्यादि से विशेष लाभ होता है।