इससे जिले में अब तक आधा दर्जन से अधिक अनाधिकृत कॉलोनियां बसाई जा चुकी हैं। जब अमर उजाला ने इस खबर का प्रकाशन किया तो एडीए हरकत में आ गया। मंगलवार को एडीए सचिव पूरी टीम के साथ हरैया गांव में जा धमके। वहां पर कई अवैध प्लॉटिंग को देखा गया।
इन प्लॉटिंग पर कार्य करने वाले मजदूरों से जब बात की तो उसमें दो बिल्डरों द्वारा लगभग दो से तीन एकड़ पृथक-पृथक भूखंड में कच्ची सड़क और ईंट से चिह्नांकित कर प्लॉट बनाकर बेचा गया है, जो न ही मानक के अनुसार है और न ही भू-उपयोग के सापेक्ष है। पूरी प्लाटिंग अनाधिकृत है।
भूखंडों का अनाधिकृत क्रय-विक्रय सीधे काश्तकार से कराया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान हो रहे निर्माण को रुकवाया गया। आम लोगों को समझाया गया कि बिना ले-आउट स्वीकृत कराए अनाधिकृत प्लॉटिंग में प्लाट खरीदने से बचें। नहीं तो एडीए द्वारा उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम 1973 की सुसंगत धाराओं के तहत नियमानुसार ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।
इसके लिए क्रेता-विक्रेता स्वयं उत्तरदायी होंगे। इसके साथ ही क्षेत्रीय अवर अभियंता व सहायक अभियंता को उपरोक्त बिल्डर्स और निर्माण करने वालों के खिलाफ सुसंगत धाराओं के तहत नियमानुसार कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
एडीए सचिव बैजनाथ ने बताया कि बिल्डरों द्वारा सीधे किसानों से एग्रीमेंट कराकर उनसे जमीन का बैनामा कराया जा रहा है। इसके कारण कहीं भी उनका नाम सामने नहीं आ रहा था। पूछताछ में दो बिल्डरों के नाम सामने आए हैं। इसके लिए दोनों को नोटिस जारी की जा रही है।इसके बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।