राग अटल कल्याण को उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को समर्पित किया है। अटल जी की जयंती 25 दिसंबर को इस राग का पहला सार्वजनिक प्रदर्शन होगा। इस राग को अभिव्यक्ति देने के लिए उन्होंने बंदिश सप्त सुरों में हम गाएं यशगान सदा... अटल अमर अक्षय होवें सम्मान सदा की रचना की है। यह राग पुरिया कल्याण के बेहद करीब है।
दूसरी शिवमंजरी राग चारूकेशी के समकक्ष है। इस राग के लिए उन्होंने भगवान शंकर पर आधारित बंदिश हे करुणाकर, हे महेश्वर कृपा करो...रची है जबकि गंगा रंजनी पर आधारित बंदिश मातु गंगा त्रिभुवन तारिनी, पाप हरो हम सब जनमानस को...। इन रागों में पंचम ताल का प्रयोग नहीं है जबकि शेष शुद्ध स्वर का समावेश है।
उपशास्त्रीय गायिका सुचरिता दास गुप्ता ने बताया कि खाली समय में सुबह का राग शबनमी रचा गया है। भैरव थाट राग के समकक्ष राग शबनमी में बनारस की गंगा जमुनी तहजीब के स्वर हैं। यह राग उन्होंने अपनी धर्मपुत्री डॉ. शबनम खातून को समर्पित किया है।
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