आगामी 18 अप्रैल से 30 मई तक काशी में ‘संगीत ग्राम’ जैसा नजारा होगा। आशा भोसले, जाकिर हुसैन, निलाद्रे कुमार, अमजद अली सरीखे कलाकार अपनी प्रस्तुतियों से समां बांधेंगे। ख्यातलब्ध विदेशी कलाकारों की जुगलबंदी होगी। नवोदित कलाकारों को मंच भी मिलेगा और संगीत की बारीकियां सीखने का मौका भी।
गायन-वादन के इन तमाम अद्भुत अहसासों से संगीत प्रेमियों को रूबरू कराएगा ‘सुर गंगा’। यह आयोजन यूनेस्को के क्रिएटिव सिटी नेटवर्क में ‘संगीत का रचनात्मक नगर’ के रूप में वाराणसी के चयन के जश्न रूप में होने जा रहा है।
संगीत प्रस्तुतियों के लिए नागरी नाटक मंडली से गंगा तट तक छह पवेलियन बनाए जा रहे हैं। संस्कृत मंत्रालय भारत सरकार के अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर, संगीत नाटक एकेडमी के संयोजन और नगर निगम के सहयोग से आयोजन की तैयारियां तेजी से मुकम्मल की जा रही हैं।
पूरे शहर को इस जश्न के रंग में रंगने की तैयारी है। आयोजन का उद्देश्य सांस्कृतिक आदान-प्रदान के साथ काशी की संगीत विरासत को दुनिया तक पहुंचाने और इसके जरिए यहां पर्यटन को बढ़ावा देने की है।
18 अप्रैल से दो मई तक ‘म्यूजिक जंक्शन’
सेमिनार, कार्यशालाओं के साथ-साथ गायन-वादन की विभिन्न विधाओं की प्रस्तुतियां होंगी। गुरु-शिष्य परंपरा के तहत ख्यात कलाकार नवोदित कलाकारों को संगीत की बारीकियां बताएंगे।
इस दौरान बनारस घराने की आर्काइवल गैलरी भी सजाई जानी है। विदेशों से भी नवोदित कलाकारों के अलावा संगीत के विद्यार्थी बारीकियां सीखने यहां आएंगे।
21 से 23 अप्रैल तक ‘सिंफनी’
भैंसासुर घाट पर आयोजित होने वाला यह संगीत कार्यक्रम आकर्षण का केंद्र होगा। गंगा किनारे मंच बनेगा, जिस पर देश-विदेश के कई नामीगिरामी कलाकार संगीत की महफिल सजाएंगे।
पार्श्व गायिका आशा भोसले, तबला सम्राट जाकिर हुसैन, सरोद वादक अमजद अली खान, ड्रमर शिवमणी, सितार वादक नीलाद्रे जैसे नामी कलाकारों की यहां प्रस्तुतियां होंगी।