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गीतकार अंजान की याद से सजी सुर गंगा की शाम, समीर ने अंदाजे बयां से जीता दिल

Thu, 27 Apr 2017 10:43 AM IST
ब्यूरो,अमर उजाला,वाराणसी
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गीतों पर झूमे लोग, खुद समीर भी थिरके - फोटो : अमर उजाला
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गंगा किनारे भैंसासुर घाट पर चल रहे सुर गंगा संगीत महोत्सव की छठी निशा महान गीतकार अंजान को समर्पित रही। समारोह का निर्देशन उनके पुत्र और पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा गीत लिख अपनी पहचान बनाने वाले प्रख्यात गीतकार समीर ने किया।
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संगीत की इस निशा में अंजान साहब के लिखे एक से बढ़कर एक गीत उन्होंने प्रस्तुत किए। साथ ही, उन गीतों के इतिहास से जुड़े रोचक किस्से भी श्रोताओं को सुनाए। समीर के गानों पर लोग झूमते-थिरकते नजर आए। 

मुंबई से आए वायलैंट बैंड के कलाकारों ने अंजान साहब के लिखे गीतों को आवाज दी तो लगा मानो सत्तर के दशक का बालीवुड संगीत घाट पर उतर आया हो। सबसे पहले गायिका प्रियंका मित्रा ने गंगा की सौगंध फिल्म का लिखा गीत ‘मानो तो मैं गंगा मां हूं’ प्रस्तुत कर मॉ गंगा को स्वराजंली अर्पित कर निशा की सांगितिक यात्रा का आगाज किया।
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उसके बाद उन्होंने मेरी सांसों को जो महका रही, दिल तो है दिल, मुझे नौ लखा मंगा दे रे, गोरी है कलाईंयां आदि गीत प्रस्तुत कर श्रोताओं की खूब वाहवाही लूटी। उसके बाद गायक जुनैद खान ने आपके हसीन रूख पे, गोरकी-पतरकी आदि गीत पेश किया। 

समारोह में गायक जमाल खान ने सत्तर और नब्बे के दशक के अमिताभ की यादें ताजा कर दीं। कभी उनकी फिल्मों के गानों को सुर में ढाला तो कभी अमिताभ का रूप धर मंच पर प्रस्तुत हुए। उन्होंने पग घूंघरू बांधे मीरा नाचेगी गाया तो सभी श्रोता अपनी जगह खड़े होकर थिरकने लगे।

खुद समीर भी गीतों पर थिरकते नजर आए। उसके बाद खई के पान बनारस वाला और ई है बंबई नगरिया पेश कर पूरे माहौल को ही पूरबिया स्वरूप दे दिया।

लोग कहते है मै शराबी हूं, अरे दीवानो मुझे पहचानो

सुर गंगा संगीत महोत्सव - फोटो : अमर उजाला
गायक नानू गुर्जर ने मंच संभाला तो उन्होंने भी अंजान साहब के लिखे गीतों को आवाज देकर माहौल को रूहानी बना दिया। उन्होंने रोते हुए आते है सब, लोग कहते है मै शराबी हूं,  अरे दीवानो मुझे पहचानो आदि बालीवुड के तराने पेश किए।

समारोह में युवा गायिका दीपांशी यादव ने भी अपनी मखमली आवाज से श्रोताओं को दीवाना बनाया। उन्होंने सलाम -ए - इश्क, बाबुल का ये घर, दिल तो है दिल आदि गीतों की सुमधुर प्रस्तुति दी।

 इससे पहले समारोह का शुभारंभ केन्द्रीय देवदीपावली महासमिति के तत्वावधान में आयोजित गंगा आरती के साथ हुआ। उसके बाद युवा कलाकार मनीष शर्मा ने सुर गंगा का थीम सांग प्रस्तुत किया।

समारोह में अंजान जी को समर्पित चलचित्र भी दिखाए गए। गीतकार समीर का स्वागत एवं अभिनंदन डॉ. प्रमोद जायसवाल ने अंगवस्त्रम, माल्यार्पण, पुष्पगुच्छ एवं स्मृति चिह्न देकर किया। समारोह में महापौर रामगोपाल मोहले, पातालपुरी मठ के बालक दास महाराज आदि विशेष रूप से उपस्थित रहे। संचालन प्रख्यात रंगकर्मी रतिशंकर त्रिपाठी ने किया। 
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सुर गंगा संगीत महोत्सव - फोटो : अमर उजाला
 पहली बार पिता जी को समर्पित कार्यक्रम का आयोजन हो रहा है जो उनके लिए बनारस की तरफ  से एक सच्ची श्रद्धांजलि है। यह कहना था, देश के विख्यात गीतकार समीर का जो वाराणसी के भैंसासुर घाट पर आयोजित हो रहे सुर गंगा संगीत महोत्सव में अपने पिता अंजान को समर्पित संध्या में शिरकत करने आए थे। उन्होंने कहा कि पुरानी गीतों को दौर बहुत जल्द लौटेगा, चूंकि यह परिवर्तन का समय चल रहा है इसलिए संगीत उससे अछूता कैसे रह सकता है। पांच सौ से ज्यादा फिल्मों के लिए गाने लिख गिनीज बुक में नाम दर्ज कराने वाले समीर ने बनारस के संगीत की बात करते हुए कहा कि यहां का लोक संगीत इतना मजबूत है कि बालीवुड के लिए वह अति आवश्यक हो जाता है। उत्तर प्रदेश और पंजाब संगीत का गढ़ है और रहेगा।

सुर गंगा में आज
सुर गंगा संगीत महोत्सव में सातवें दिन गुरुवार को लोक संगीत संध्या का आयोजन होगा। प्रसिद्द लोक गायिका पद्मश्री मालिनी अवस्थी सहित कई नामीगिरामी लोक गायक अपनी प्रस्तुतियां देंगे। 
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